UP प्रशासन में भूचाल: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा, शंकराचार्य के अपमान से आहत

उत्तर प्रदेश: के प्रशासनिक गलियारों में सोमवार को उस समय हलचल मच गई जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। खास बात यह रही कि उन्होंने यह इस्तीफा 26 जनवरी—गणतंत्र दिवस के दिन दिया, जिसने इस फैसले को और अधिक प्रतीकात्मक बना दिया।

अलंकार अग्निहोत्री, जो कि 2016 बैच के PCS अधिकारी हैं (पत्र में स्वयं को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताते हैं), ने यह कदम प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट के विरोध में उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है।


सात पन्नों का तीखा इस्तीफा पत्र

राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए सात पन्नों के इस्तीफा पत्र में अलंकार अग्निहोत्री ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। पत्र के अंत में उन्होंने लिखा:

“अब केंद्र और राज्य सरकार में न जनतंत्र है, न गणतंत्र — केवल भ्रमतंत्र है। देश में अब देशी सरकार नहीं, विदेशी जनता पार्टी की सरकार है।”

यह बयान प्रशासनिक सेवा में रहते हुए किसी अधिकारी द्वारा दिया गया अत्यंत असामान्य और साहसिक वक्तव्य माना जा रहा है।


शंकराचार्य प्रकरण से आहत अधिकारी

अपने इस्तीफे में अग्निहोत्री ने लिखा कि मौनी अमावस्या स्नान के दौरान प्रयागराज में ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य बटुक और ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की।

उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • वृद्ध आचार्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ

  • बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर शिखा पकड़कर घसीटा गया

  • यह कृत्य ब्राह्मणों और संत समाज की धार्मिक-सांस्कृतिक मर्यादा का उल्लंघन है

अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्वयं ब्राह्मण वर्ण से आते हैं, और इस घटना ने उन्हें आत्मिक रूप से आहत किया है।


सरकार पर गंभीर आरोप

पत्र में उन्होंने लिखा कि प्रयागराज की घटना से यह प्रतीत होता है कि:

  • स्थानीय प्रशासन ब्राह्मणों के प्रति अपमानजनक रवैया अपना रहा है

  • वर्तमान राज्य सरकार ब्राह्मण-विरोधी विचारधारा के साथ कार्य कर रही है

  • साधु-संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है

उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को “चिंतनीय और गंभीर” करार दिया।


यूजीसी बिल के खिलाफ खुला विरोध

इस्तीफे के साथ-साथ अलंकार अग्निहोत्री का यूजीसी के नए कानून के खिलाफ विरोध भी सामने आया है। सोमवार को सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें वे हाथ में पोस्टर लिए नजर आ रहे हैं।

पोस्टर पर लिखा था:

#UGC_RollBack
काला कानून वापस लो
शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान

यह तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है और सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।


प्रशासनिक हलकों में खलबली

एक सिटी मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी का इस तरह सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देना और सरकार पर सीधे आरोप लगाना, उत्तर प्रदेश प्रशासन में असाधारण घटना मानी जा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


निष्कर्ष:

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सरकार, व्यवस्था और विचारधारा के खिलाफ खुला प्रतिरोध बनकर सामने आया है। शंकराचार्य प्रकरण और यूजीसी बिल को लेकर उठाए गए इस कदम ने न सिर्फ यूपी बल्कि पूरे देश में प्रशासनिक निष्पक्षता, धार्मिक सम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर नई बहस छेड़ दी है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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