चमोली: उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों केदारनाथ और बद्रीनाथ समेत चारधाम और मंदिर समितियों के अधीन आने वाले कुल 50 मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी तेज हो गई है। इस संबंध में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC), गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर समितियों की ओर से प्रस्ताव तैयार किए गए हैं, जिन पर सरकार स्तर पर सहमति बनती दिख रही है।
हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि यह प्रतिबंध सिख, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों पर लागू नहीं होगा।
बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
वहीं, केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा महाशिवरात्रि के अवसर पर की जाएगी।
BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ समेत समिति के अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
इस बैठक में तीर्थ पुरोहित, धर्माधिकारी और संत समाज के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-हिंदू से आशय उन लोगों से है, जिनकी सनातन धर्म में आस्था नहीं है। जो लोग सनातन परंपरा में विश्वास रखते हैं, उनके लिए चारधाम के द्वार खुले रहेंगे।
गंगोत्री मंदिर समिति की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गंगोत्री धाम और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाए।
मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि सिख धर्म को हिंदू परंपरा की शाखा माना जाता है, इसलिए उन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
यमुनोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि वहां भी गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है और इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार धार्मिक संगठनों, तीर्थ पुरोहितों और संत समाज की भावना को ध्यान में रखते हुए ही निर्णय लेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धामों से जुड़े पहले से बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
BKTC के अधीन आने वाले प्रमुख मंदिरों में शामिल हैं:
श्री केदारनाथ धाम
श्री बद्रीनाथ धाम
तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर, भविष्यबद्री
नरसिंह मंदिर (जोशीमठ)
त्रियुगीनारायण मंदिर
कालीमठ के तीनों शक्ति पीठ
पंच बदरी, पंच केदार से जुड़े मंदिर
केदारनाथ परिसर के सभी छोटे मंदिर
शंकराचार्य समाधि / भैरवनाथ मंदिर
(कुल लगभग 50 मंदिर)
2025 के यात्रा सीजन में
केदारनाथ धाम में 16,56,539 श्रद्धालु
बद्रीनाथ धाम में करीब 16.5 लाख श्रद्धालु पहुंचे
देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए यह प्रस्ताव बेहद अहम है, क्योंकि अधिकांश श्रद्धालु पहले से यात्रा की योजना, टिकट और होटल बुकिंग कर लेते हैं। ऐसे में नियम लागू होने के बाद पहचान और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी होगा।
श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन 1939 के अधिनियम के तहत हुआ है।
इस कानून के अनुसार समिति को बायलॉज बनाने का अधिकार है, लेकिन किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले राज्य सरकार की पुष्टि और विधिवत अधिसूचना जरूरी होगी।
यानी केवल प्रस्ताव पास होना ही अंतिम कदम नहीं होगा।
केदारनाथ-बद्रीनाथ समेत उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन का प्रस्ताव धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। अब सबकी नजर BKTC की बोर्ड बैठक और राज्य सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी है। यह निर्णय न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश से आने वाले श्रद्धालुओं को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।
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