“यह यार क्या है?” लोकसभा में भड़के पीठासीन सभापति, विपक्ष की भाषा पर लगी कड़ी फटकार

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को भी लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला। कार्यवाही के बीच लद्दाख सीमा विवाद को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि विपक्षी सांसद सदन के पोडियम तक पहुंच गए, कुछ कागज चेयर की ओर फेंके गए और अंततः पीठासीन सभापति को कड़ी फटकार लगानी पड़ी।

लद्दाख मुद्दे पर अड़ा विपक्ष

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लद्दाख सीमा विवाद का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार भारत-चीन सीमा को लेकर देश को गुमराह कर रही है।
वहीं, चेयर की ओर से बार-बार यह कहा गया कि सदन में केवल प्रामाणिक स्रोतों (Authentic Sources) के आधार पर ही बात रखी जाए।

इस पर विपक्षी सांसदों ने चेयर के फैसले पर आपत्ति जताई और मांग की कि राहुल गांधी को इस विषय पर बोलने की अनुमति दी जाए।

चेयर के करीब पहुंचे सांसद, बढ़ा तनाव

बहस के दौरान विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सभापति के चेयर के बेहद करीब पहुंच गए। इसी दौरान शोर-शराबा बढ़ा और कुछ कागज चेयर की ओर फेंके गए, जिससे सदन का माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

‘यार’ कहने पर भड़के सभापति

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे कृष्ण प्रसाद तेन्नटी ने एक सांसद द्वारा चेयर को ‘यार’ कहकर संबोधित करने पर कड़ी नाराजगी जताई।

सभापति ने सख्त लहजे में कहा—

“यह यार क्या है? आप चेयर को इस तरह संबोधित नहीं कर सकते। यह संसद है, यह लोकसभा है। यहां भाषा और मर्यादा का पालन होना चाहिए।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने खुद नेता प्रतिपक्ष से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने का आग्रह किया था, लेकिन विपक्ष सहयोग नहीं कर रहा।

विपक्ष ने बोलने से किया इनकार

इसके बाद सभापति ने समाजवादी पार्टी के सांसद नरेश उत्तम पटेल को बोलने के लिए बुलाया, लेकिन उन्होंने भी इनकार कर दिया।
चेयर द्वारा बुलाए गए अन्य विपक्षी सांसदों ने भी भाषण देने से मना कर दिया।

सदन स्थगित

लगातार नारेबाजी और हंगामे के बीच अंततः टीडीपी सांसद जीएम हरीश बालायोगी धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए, लेकिन शोर थम नहीं सका।
स्थिति को संभालते हुए सभापति ने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।


निष्कर्ष:

लद्दाख सीमा विवाद को लेकर लोकसभा में हुआ यह हंगामा न सिर्फ सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को दिखाता है, बल्कि संसदीय मर्यादा और भाषा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। चेयर को ‘यार’ कहे जाने पर सभापति की सख्ती ने साफ कर दिया कि सदन में असहमति हो सकती है, लेकिन अनुशासन और सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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