लखनऊ डीएम का सख्त रुख: नायब तहसीलदार को जमकर फटकार, बोले– सस्पेंड कर दूंगा; वकीलों ने रिश्वतखोरी के लगाए आरोप

लखनऊ: की सरोजनी नगर तहसील में शनिवार को आयोजित समाधान दिवस उस वक्त हंगामे में बदल गया, जब वकीलों के दो गुट नायब तहसीलदार बिजनौर और उनके पेशकार को लेकर आमने-सामने आ गए। एक पक्ष ने अधिकारियों पर रिश्वत लेकर काम करने का गंभीर आरोप लगाया, जबकि दूसरे गुट ने इन आरोपों को निराधार बताया।

समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर फरियादियों की शिकायतें सुन रहे थे। इसी दौरान एक अधिवक्ता नायब तहसीलदार बिजनौर के न्यायालय से संबंधित एक फाइल लेकर डीएम के पास पहुंचा और आरोप लगाया कि मामले में आदेश पारित हो चुका है, लेकिन नायब तहसीलदार उस पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं।


कोर्ट की फाइल बाहर पहुंची, डीएम भड़के

फाइल देखकर जिलाधिकारी भड़क गए। उन्होंने नायब तहसीलदार विवेक सिंह से सख्ती से पूछा कि उनके न्यायालय की फाइल बाहर कैसे पहुंची। नायब तहसीलदार संतोषजनक जवाब नहीं दे सके और पेशकार पर फाइल बाहर देने का आरोप लगा दिया।

इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा—
“ऐसे काम करोगे तो सस्पेंड कर दूंगा।”

हालांकि मौके पर कोई निलंबन नहीं किया गया, लेकिन डीएम ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।


वकीलों का आरोप: रिश्वत के बिना नहीं होता काम

सरोजनी नगर तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलेश प्रताप सिंह चौहान और महामंत्री राजेंद्र यादव के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी। अधिवक्ताओं का आरोप है कि—

  • नायब तहसीलदार और उनके पेशकार रिश्वत लेकर मामलों का निस्तारण करते हैं

  • उपनिबंधक-प्रथम कार्यालय में प्राइवेट कर्मचारियों से अवैध वसूली कराई जा रही है

  • उप जिलाधिकारी P2 के कार्यालय में नियमित कर्मचारी नहीं हैं, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है

इसके साथ ही अधिवक्ताओं ने एसीपी कृष्णा नगर का कार्यालय तहसील परिसर में स्थानांतरित करने की भी मांग की।


लेखपाल-कानूनगो पर भी उठे सवाल

बार एसोसिएशन महामंत्री राजेंद्र यादव ने बताया कि लेखपाल और कानूनगो निश्चित समय और स्थान पर नहीं बैठते, जिससे अधिवक्ताओं और फरियादियों को भारी परेशानी हो रही है।


ग्राम प्रधान की शिकायत पर सख्त आदेश

समाधान दिवस में कुरौनी ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान संतोष यादव ने डीएम से शिकायत की कि करीब 7 साल पहले ग्राम पंचायत की 30 बीघा सरकारी जमीन पीएनसी कंपनी को किराए पर दी गई थी। कंपनी ने मिक्सर प्लांट लगाया, लेकिन—

  • न तो किराया दिया

  • न ही जमीन खाली की

इस पर जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद निर्माण सामग्री को तत्काल सीज करने के आदेश दिए।


अधिकारियों के समर्थन में भी पहुंचा दूसरा गुट

इसके बाद सरोजनी नगर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह और महामंत्री गोविंद शुक्ला के नेतृत्व में वकीलों का दूसरा गुट डीएम से मिला और अधिकारियों के समर्थन में पक्ष रखा।

इसके बावजूद जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


निष्कर्ष:

Lucknow DM Naib Tehsildar Scolding मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और तहसील व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डीएम की सख्ती से साफ है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच के बाद आने वाला फैसला आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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