सोनिया गांधी वोटर लिस्ट केस में कोर्ट को जवाब: नागरिकता–मतदाता सूची सरकार और EC के विषय, निजी शिकायत पर क्रिमिनल एक्शन गलत

नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने के मामले में दायर याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उनके खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका गलत तथ्यों, अनुमानों और राजनीतिक दुर्भावना पर आधारित है।

राउज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल जज (CBI) विशाल गोगने की अदालत को शनिवार को दिए गए जवाब में सोनिया गांधी ने कहा कि यह याचिका ओछी राजनीति से प्रेरित है और इसका उद्देश्य केवल उन्हें बदनाम करना है। उन्होंने कोर्ट से याचिका को खारिज करने की मांग की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी को होगी।


सोनिया गांधी ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं

अपने जवाब में सोनिया गांधी ने कई अहम कानूनी बिंदुओं को रखा—

  • शिकायतकर्ता ने ऑथेंटिक सरकारी रिकॉर्ड के बजाय मीडिया रिपोर्टों और व्यक्तिगत धारणाओं के आधार पर आरोप लगाए हैं।

  • किसी भी दस्तावेज को जाली या फर्जी साबित नहीं किया गया है, न ही आवश्यक कानूनी विवरण प्रस्तुत किया गया है।

  • नागरिकता से जुड़े सभी मामले पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

  • मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) का निर्माण, संशोधन और रखरखाव चुनाव आयोग (ECI) की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

  • इस तरह के मामलों में निजी शिकायत के आधार पर आपराधिक अदालतों का हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया में दखल माना जाएगा, जो कानूनन उचित नहीं है।

सोनिया गांधी ने कहा कि क्रिमिनल कोर्ट को इस तरह के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका प्रभावित होती है।


अब तक केस में क्या हुआ

इस मामले की पृष्ठभूमि में घटनाक्रम इस प्रकार रहा—

  • 11 सितंबर 2025 को ACMM वैभव चौरसिया ने विकास त्रिपाठी की शिकायत खारिज कर दी थी।

  • शिकायत खारिज होने के बाद त्रिपाठी ने सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की।

  • 9 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया।

  • शिकायतकर्ता का दावा है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था, जबकि वे अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिक बनी थीं।

  • यह भी आरोप लगाया गया कि 1982 में उनका नाम हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा जोड़ा गया।


भाजपा ने भी लगाए थे आरोप

इस विवाद में राजनीति भी तेज रही है।
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने 13 अगस्त को दावा किया था कि—

  • सोनिया गांधी का नाम दो बार वोटर लिस्ट में उस समय शामिल किया गया, जब वे भारतीय नागरिक नहीं थीं।

  • उन्होंने इसे चुनावी कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन बताया था।

अमित मालवीय ने X (पूर्व ट्विटर) पर यह भी कहा था कि यही वजह है कि कांग्रेस स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसी प्रक्रियाओं का विरोध करती है।


निष्कर्ष:

Sonia Gandhi Voter List Case अब एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। सोनिया गांधी ने साफ किया है कि नागरिकता और वोटर लिस्ट जैसे विषय संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, न कि आपराधिक अदालतों के। 21 फरवरी को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि कोर्ट इस पुनर्विचार याचिका को आगे बढ़ाती है या इसे खारिज कर देती है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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