गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है। वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupen Borah ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह जानकारी खुद मीडिया को दी।
सूत्रों के मुताबिक, बोरा ने अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge को भेजा है। अपने पत्र में उन्होंने पार्टी नेतृत्व द्वारा अनदेखी किए जाने और राज्य इकाई में उचित स्थान न मिलने का आरोप लगाया है।
मीडिया से बातचीत में भूपेन बोरा ने कहा, “मैंने आज सुबह 8 बजे कांग्रेस आलाकमान को अपना इस्तीफा भेज दिया है। मैंने विस्तार से बताया है कि मुझे यह कदम क्यों उठाना पड़ा। यह कोई व्यक्तिगत फैसला नहीं है। मैंने 1994 में कांग्रेस जॉइन की थी और 32 साल पार्टी को दिए हैं। यह निर्णय पार्टी के भविष्य की चिंता से प्रेरित है।”
उन्होंने कहा कि जब उचित समय होगा, तब वे अपने इस्तीफे के कारणों पर विस्तार से बोलेंगे।
भूपेन बोरा ने यह भी संकेत दिया कि दो-तीन राजनीतिक दलों ने उनसे संपर्क किया है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष दल का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हाई कमान ने भी उनसे बात की है।
इस बीच असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने बोरा के इस्तीफे का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “भूपेन बोरा असम कांग्रेस के आखिरी हिंदू नेता थे जो विधायक या मंत्री के पद पर नहीं रहे। उनका इस्तीफा प्रतीकात्मक संदेश देता है। मैं कल शाम उनके घर जाऊंगा।”
हालांकि सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि बोरा ने अभी तक भाजपा से जुड़ने के लिए संपर्क नहीं किया है।
भूपेन बोरा 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। पिछले वर्ष उनकी जगह Gaurav Gogoi को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। बोरा दो बार विधायक भी रह चुके हैं और राज्य राजनीति में उनका खासा प्रभाव रहा है।
इसी बीच असम कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता Ripun Bora ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वे पूर्व में राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। हालांकि उनके इस्तीफे के कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
असम में विधानसभा चुनाव से पहले दो बड़े नेताओं का इस्तीफा कांग्रेस के लिए संगठनात्मक चुनौती बन सकता है। पार्टी पहले ही राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। ऐसे समय में यह घटनाक्रम सियासी समीकरणों को बदल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भूपेन बोरा किसी अन्य दल में शामिल होते हैं, तो इसका सीधा असर कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक पर पड़ सकता है।
भूपेन बोरा का इस्तीफा असम की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। 32 साल तक कांग्रेस से जुड़े रहे नेता का अचानक पार्टी छोड़ना चुनावी रणनीतियों पर असर डाल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बोरा अगला कदम क्या उठाते हैं और कांग्रेस इस झटके से कैसे उबरती है।
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