जोधपुर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को जोधपुर में आयोजित माहेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन को संबोधित करते हुए माहेश्वरी समाज की खुले शब्दों में सराहना की। उन्होंने कहा कि “माहेश्वरी समाज कभी जॉब सीकर नहीं रहा, बल्कि हमेशा जॉब क्रिएटर रहा है और आने वाली सदियों तक यह समाज देश की सेवा करता रहेगा।”
पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित कई प्रमुख नेता और समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे। अमित शाह जोधपुर और जयपुर के एकदिवसीय दौरे पर रहे और शाम को दिल्ली रवाना होंगे।
अमित शाह ने एक भावुक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि राम मंदिर पर पुस्तक लिख रहे एक युवक ने उन्हें जानकारी दी कि “आजादी के बाद राम मंदिर के लिए सबसे पहले अपने प्राणों की आहुति देने वाले दोनों भाई माहेश्वरी समाज से थे।”
शाह ने कहा कि यह समाज न केवल आर्थिक रूप से बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण में भी अग्रणी रहा है।
गृह मंत्री ने माहेश्वरी समाज के इतिहास को याद करते हुए कहा—
“इस समाज के हाथ में तलवार भी उतनी ही अच्छी लगती है, जितनी तराजू। जब इनके भामाशाहों की सूची बनाई जाएगी तो कई पन्ने भर जाएंगे।”
उन्होंने कहा कि मुगलों के दौर में राजा-महाराजाओं के खजाने भरने से लेकर स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी की लड़ाई का खर्च उठाने तक माहेश्वरी समाज की भूमिका ऐतिहासिक रही है।
अमित शाह ने समाज को तीन अहम मंत्र दिए—
ऐसा उत्पादन करें जो भारत में नहीं बनता, ताकि देश आत्मनिर्भर बने।
स्वदेशी वस्तुओं का अधिकतम उपयोग करें और यह संकल्प लें कि देश में बनी चीजों का ही व्यापार करेंगे।
स्वभाषा का प्रयोग बढ़ाएं, ताकि सांस्कृतिक जड़ें मजबूत हों।
उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ, तब से उद्योग जगत में माहेश्वरी समाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अमित शाह ने गुजरात की एक प्रसिद्ध कहावत का जिक्र करते हुए कहा—
“जहां न पहुंचे रेलगाड़ी, वहां पहुंच जाए मारवाड़ी।”
उन्होंने कहा कि चाहे उत्पादन हो या टेक्नोलॉजी को अपनाना, माहेश्वरी समाज हमेशा प्रगतिशील रहा है।
समाज के बड़े आयोजनों पर होने वाली आलोचनाओं का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि ऐसे महाकुंभ भारत को मजबूत करते हैं, तोड़ते नहीं।
उन्होंने कहा—
“अगर हर समाज अपने गरीब भाई-बहनों की जिम्मेदारी खुद उठा ले, तो भारत से गरीबी मिट सकती है। अगर हर समाज आत्मनिर्भर बन जाए, तो पूरा भारत आत्मनिर्भर बन जाएगा।”
जोधपुर में अमित शाह का यह संबोधन केवल एक समाज की प्रशंसा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी सोच और सामाजिक जिम्मेदारी का स्पष्ट संदेश था।
माहेश्वरी समाज को जॉब क्रिएटर बताते हुए उन्होंने यह संकेत दिया कि अगर हर समाज इसी रास्ते पर चले, तो भारत आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से दुनिया में अग्रणी बन सकता है।
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