जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कें सोमवार को सरकारी कर्मचारियों के गुस्से और अनोखे विरोध प्रदर्शन की गवाह बनीं। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासभा के बैनर तले हजारों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतरे। अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर किए गए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए सड़क पर 'मुर्गा' बनने और राजस्थानी गीतों पर नाचने जैसे अजीबो-गरीब तरीके अपनाए।
मुर्गा बनकर जताया विरोध, रैली में थिरके कदम अल्बर्ट हॉल से शुरू हुई यह रैली जैसे ही शहर के प्रमुख चौराहों पर पहुँची, प्रदर्शन का स्तर बदल गया।
अनोखा तरीका: अलवर से आए पशुपालन निरीक्षक मानसिंह बैरवा और महेश मीणा बीच सड़क पर मुर्गा बन गए।
सांस्कृतिक विरोध: जालौर के शिक्षक भंवरलाल बिश्नोई ने राजस्थानी लोक गीतों पर नाचकर अपना दर्द बयां किया।
नारेबाजी: 'सेवा तीर्थ' की ओर बढ़ रहे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ट्रैफिक व्यवस्था हुई ध्वस्त, लगा घंटों लंबा जाम हजारों कर्मचारियों की भीड़ के कारण जयपुर का हृदय स्थल कहे जाने वाले इलाके थम गए:
प्रभावित इलाके: रामबाग सर्किल से अजमेरी गेट, स्टैच्यू सर्किल और राजमंदिर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
पुलिस से नोकझोंक: पुलिस ने जब रैली को भाजपा कार्यालय की ओर जाने से रोका और चौमूं हाउस सर्किल की तरफ डायवर्ट किया, तो नाराज कर्मचारी सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। पुलिस को ट्रैफिक सुचारू करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।
"अधिकारियों की मौज, कर्मचारियों की अनदेखी" संगठन के प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "सरकार बजट सुझावों के नाम पर हर तबके से बात कर रही है, लेकिन कर्मचारियों की बात सुनने के लिए उनके पास मात्र 40 सेकंड हैं। एसी कमरों में बैठने वाले अधिकारी नीतियां बना रहे हैं, जबकि धरातल पर काम करने वाला कर्मचारी 11 सूत्री मांगों के लिए तरस रहा है।"
सैलरी का संकट और नियमितीकरण की मांग प्रदर्शन में संविदा कर्मियों का दर्द भी छलक उठा। सवाई माधोपुर से आए शिवकुमार अग्रवाल ने आरोप लगाया कि मनरेगा संविदा कर्मियों को पिछले 6 महीने से सैलरी नहीं मिली है। उनकी मांग है कि सरकार जल्द से जल्द उन्हें नियमित करे और बकाया वेतन जारी करे।
लोकेशन: अल्बर्ट हॉल से 22 गोदाम धरना स्थल तक।
सहभागिता: बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी और विभिन्न जिलों के संविदा कर्मी शामिल हुए।
चेतावनी: कर्मचारी नेताओं ने साफ किया कि यह तो केवल शुरुआत है, यदि मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेश स्तर पर बड़ा चक्का जाम किया जाएगा।
जयपुर में हुआ यह प्रदर्शन केवल एक रैली नहीं, बल्कि राज्य के प्रशासनिक ढांचे के भीतर सुलग रहे असंतोष का प्रमाण है। 'मुर्गा' बनना और सड़क पर नाचना सरकार को यह संदेश देने की कोशिश है कि कर्मचारी अब अपनी मांगों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अब देखना यह है कि आगामी बजट में सरकार इन 'धरातल के सिपाहियों' के लिए क्या प्रावधान करती है।
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