डोटासरा ने अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज़ में सीधे जिला कलेक्टर्स को चेतावनी देते हुए कहा—
“अगर किसी अधिकारी ने नियमों से बाहर जाकर गड़बड़ी की, तो उसकी पुंगी बजा देंगे।”
डोटासरा ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता और कार्यकर्ता बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) पर दबाव बनाकर फर्जी तरीके से नाम जुड़वा रहे हैं। उन्होंने लक्ष्मणगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि नौरंग चौधरी नाम का बीजेपी कार्यकर्ता BLO के घर फॉर्म फेंककर जबरन नाम जुड़वाता है।
उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया लोकतंत्र को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोटासरा ने सबसे चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा—
“कुछ बड़े अधिकारी BLO का OTP तक ले रहे हैं और बल्क में नाम जोड़े जा रहे हैं।”
डोटासरा के मुताबिक, हर बूथ पर 50-50 नए नाम जोड़ने का टारगेट फिक्स किया गया है।
किसका नाम काटना है और किसका जोड़ना है, यह पहले से तय है।
उन्होंने इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
डोटासरा ने प्रदेशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं और BLA (Booth Level Agent) को निर्देश देते हुए कहा—
“कल सुबह 11 बजे सभी SDM कार्यालय पहुंचें और वहां बल्क में आए फॉर्म्स की जानकारी मांगें। प्रशासन को जवाब देना होगा कि ये नाम कहां से और कैसे आए।”
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा। उन्होंने कहा—
“मैं करीब 28 हजार वोटों से चुनाव जीता और संयोग देखिए, मेरे ही क्षेत्र में 28 हजार नाम काट दिए गए।”
जूली ने सवाल उठाया कि जो नए नाम जोड़ने के फॉर्म आए हैं, वे किसने दिए और किसने जमा किए?
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नहीं है।
जूली ने मांग की कि सभी सरकारी दफ्तरों के CCTV फुटेज जब्त कर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
उन्होंने कहा कि—
“500-500 प्रिंटेड फॉर्म्स से नाम काटे जा रहे हैं, जबकि उनमें मोबाइल नंबर तक नहीं है, जो कानूनन अनिवार्य है।”
जूली ने तीखे शब्दों में कहा—
“अगर बीजेपी को जीतने की इतनी ही भूख है, तो चुनाव ही बंद करवा देने चाहिए।”
उन्होंने आशंका जताई कि अब पोल खुलने के बाद बीजेपी के लोग फॉर्म्स वापस ले जाने की कोशिश कर सकते हैं।
जूली ने साफ कहा—
“ये फॉर्म अब सरकारी प्रॉपर्टी हैं। एक भी कागज बाहर नहीं जाना चाहिए। ऐसा दुस्साहस पहले कभी नहीं हुआ।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि—
“आज जांच नहीं हो रही, तो यह मत समझिए कि कभी नहीं होगी। गलत करने वाले अफसरों को भविष्य में भी नहीं छोड़ा जाएगा।”
राजस्थान में SIR को लेकर उठा विवाद अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि लोकतंत्र बनाम सत्ता की लड़ाई बनता जा रहा है। कांग्रेस के गंभीर आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें प्रशासन और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्या आरोपों की जांच होगी या सियासी जंग और तेज़ होगी?
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