उत्तर प्रदेश: की राजनीति में एक बार फिर बृजभूषण शरण सिंह का नाम चर्चा में है। गोंडा में आयोजित राष्ट्रकथा के बाद सियासी गलियारों में दो सवाल तेजी से घूम रहे हैं—
क्या बृजभूषण शरण सिंह अगला लोकसभा चुनाव अयोध्या की फैजाबाद सीट से लड़ने की तैयारी में हैं?
और क्या भाजपा उन्हें हिंदुत्व की प्रतीक मानी जाने वाली इस सीट से टिकट देगी?
छह बार सांसद रह चुके और कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण ने 2024 में भाजपा टिकट न मिलने के बाद अपने छोटे बेटे करण भूषण शरण सिंह को कैसरगंज से चुनाव लड़वाया, जो अब सांसद हैं। इसके साथ ही बृजभूषण ने संकेत दे दिए हैं कि वे खुद 2029 में चुनावी मैदान में उतरेंगे।
राष्ट्रकथा के दौरान भावुक अंदाज में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा—
“मेरे खिलाफ षड्यंत्र हुआ, साजिश के तहत हटाया गया। अगर 2029 तक जिंदा रहा तो पूरे सम्मान के साथ संसद जरूर जाऊंगा।”
इसके बाद उनके बेटे करण भूषण ने भी ऐलान कर दिया कि 2029 में पिता-पुत्र दोनों लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। बृजभूषण ने साफ कहा—
“भाजपा टिकट देगी तो अच्छा, नहीं तो कहीं और से चुनाव लड़ेंगे।”
इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि बृजभूषण कैसरगंज बेटे के लिए छोड़कर खुद फैजाबाद सीट से दांव खेल सकते हैं।
2024 लोकसभा चुनाव में राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बावजूद भाजपा को फैजाबाद सीट पर हार का सामना करना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह चुनाव हार गए। इसके बाद यह सीट पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2029 में भाजपा लल्लू सिंह से अलग किसी मजबूत चेहरे की तलाश कर सकती है। बृजभूषण समर्थकों का दावा है कि उनका स्थानीय पकड़, संगठन पर प्रभाव और हिंदुत्व की राजनीति उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
बृजभूषण की पढ़ाई भी अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से हुई है, जहां वे छात्रसंघ महामंत्री रहे। यानी अयोध्या से उनका पुराना राजनीतिक और भावनात्मक जुड़ाव रहा है।
हालिया राष्ट्रकथा के दौरान अयोध्या में बृजभूषण के बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर लगाए गए। समर्थकों ने इसे साफ संकेत माना कि वे फैजाबाद सीट से चुनाव की जमीन तैयार कर रहे हैं। आयोजन के दौरान उनके काफिले पर जेसीबी से फूल बरसाए जाने की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
हालांकि फैजाबाद की राह बृजभूषण के लिए आसान नहीं है। भाजपा के फायरब्रांड नेता और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे विनय कटियार पहले से ही अयोध्या में सक्रिय हैं।
भास्कर से बातचीत में कटियार ने साफ कहा—
“पहले विधानसभा, फिर लोकसभा चुनाव लड़ूंगा।”
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात के बाद कटियार ने यह भी संकेत दे दिया कि फैजाबाद उनकी सीट है। फैजाबाद और आसपास के क्षेत्रों में कुर्मी वोट बैंक की बड़ी संख्या है, जिस पर कटियार की मजबूत पकड़ मानी जाती है।
महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों के चलते बृजभूषण को 2024 में टिकट नहीं मिला था। वे पॉक्सो एक्ट से बरी हो चुके हैं, लेकिन यौन शोषण का मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है। यही वजह है कि भाजपा के लिए उन्हें टिकट देना राजनीतिक और नैतिक दोनों स्तर पर चुनौती हो सकता है।
फैजाबाद लोकसभा सीट 2029 में भाजपा के लिए सबसे अहम सीटों में से एक होगी। एक तरफ बाहुबली छवि वाले बृजभूषण शरण सिंह, दूसरी तरफ राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा विनय कटियार—दोनों का दावा भाजपा के लिए कठिन फैसला बन सकता है। अब देखना यह होगा कि पार्टी हिंदुत्व, छवि और चुनावी गणित में किसे प्राथमिकता देती है।
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