मुख्यमंत्री रेशम योजना के तहत आयोजित मेले में किसानों को तकनीक, प्रशिक्षण और आर्थिक मदद की जानकारी

गोंडा: उत्तर प्रदेश के Gonda जिले में सोमवार को आयोजित एक दिवसीय रेशम मेला और प्रदर्शनी ने किसानों के बीच नई उम्मीद और आत्मनिर्भरता का संदेश दिया। राजकीय रेशम फार्म, करनपुर में मुख्यमंत्री रेशम योजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया और रेशम उत्पादन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की।

इस मेले का आयोजन रेशम विकास विभाग द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ रेशम उत्पादन जैसे वैकल्पिक रोजगार से जोड़ना है। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकास खंडों से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद किया।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ करनैलगंज विधायक के प्रतिनिधि सूरज सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार की योजनाएं किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बनाई गई हैं।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रेशम उत्पादन को अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

वैज्ञानिकों ने दी आधुनिक तकनीक की जानकारी

मेले का मुख्य आकर्षण रहा विशेषज्ञों द्वारा दिया गया तकनीकी प्रशिक्षण। केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक राम लखन राम ने किसानों को रेशम कीट पालन (सेरीकल्चर) की आधुनिक विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सही तापमान, पोषण और देखभाल के जरिए रेशम उत्पादन को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। साथ ही, रोग प्रबंधन और बेहतर उत्पादन के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इस पर भी किसानों को प्रशिक्षित किया गया।

प्रगतिशील किसानों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान रेशम उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया। प्रगतिशील रेशम उत्पादक गुड़िया और किस्मत को नगर पंचायत अध्यक्ष वासुदेव सिंह द्वारा शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

यह सम्मान अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बना, जिससे वे भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित हुए।

सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम में जिला उद्यान अधिकारी रश्मि शर्मा और सेवानिवृत्त सहायक निदेशक रेशम आर.एल. मौर्य ने किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि रेशम उत्पादन अपनाने वाले किसानों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और विपणन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इससे किसान कम लागत में अधिक लाभ कमा सकते हैं।

स्टॉल्स पर दिखी नई तकनीक और उत्पाद

मेले में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें स्वयं सहायता समूह, रेशम विभाग, उद्यान विभाग और कृषि विभाग शामिल रहे।

इन स्टॉल्स पर किसानों को रेशम उत्पादन की प्रक्रिया, उपकरण, बीज, और तैयार उत्पादों की जानकारी दी गई। किसानों ने इन स्टॉल्स का अवलोकन कर नई तकनीकों को समझा और विशेषज्ञों से अपने सवालों के जवाब भी प्राप्त किए।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

सहायक निदेशक रेशम नितेश सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया गया। अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि रेशम उत्पादन अपनाने पर उन्हें हर संभव सहायता दी जाएगी।

कार्यक्रम में सहायक रेशम विकास अधिकारी विवेक श्रीवास्तव और प्रतिभा यादव सहित कई अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने किसानों को योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गोंडा में आयोजित यह रेशम मेला न केवल एक प्रदर्शनी था, बल्कि किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुआ। आधुनिक तकनीक, सरकारी सहयोग और बाजार की संभावनाओं के साथ रेशम उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

यदि ऐसे आयोजनों की निरंतरता बनी रही, तो यह न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि ग्रामीण विकास को भी नई दिशा देगा।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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