राजस्थान: की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में विकास कार्य ‘इंतजारशास्त्र’ की भेंट चढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने खासतौर पर जयपुर में बने Mahatma Gandhi Institute of Governance and Social Sciences को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
गहलोत ने कहा कि दिसंबर 2023 से प्रदेश में कई जनहितकारी योजनाओं और प्रोजेक्ट्स की रफ्तार जानबूझकर धीमी कर दी गई है। इससे न केवल परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है, बल्कि आम जनता को मिलने वाले लाभ भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इसे ‘इंतजारशास्त्र’ की संज्ञा देते हुए सरकार की कार्यशैली पर तंज कसा।
उन्होंने विशेष रूप से जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट का जिक्र करते हुए कहा कि यह भव्य संस्थान वर्ष 2024 में ही बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन अभी तक इसे शुरू नहीं किया गया। गहलोत ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इस संस्थान को चालू करने से क्यों कतरा रही है? क्या इसके पीछे राजनीतिक कारण हैं?
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा और शोध सुविधाएं उपलब्ध कराना था। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2022 में करीब 233 करोड़ रुपए के बजट से इस प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी। इसे Tata Institute of Social Sciences और MIT Pune जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की तर्ज पर विकसित करने की योजना थी।
गहलोत के अनुसार, इस संस्थान को स्वायत्त दर्जा देने के लिए विधेयक भी पारित किया गया था, ताकि यह राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहकर शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर सके। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान किसी एक सरकार या दल के नहीं होते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बनाए जाते हैं।
उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि महात्मा गांधी के नाम पर बने इस संस्थान को शुरू न करना एक तरह से उनके आदर्शों के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। गहलोत ने कहा कि राष्ट्रपिता Mahatma Gandhi के नाम और उनके विचारों से राजनीतिक द्वेष रखना दुर्भाग्यपूर्ण है।
गहलोत ने अपने बयान में युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हजारों छात्र इस संस्थान में प्रवेश लेने का सपना देख रहे हैं। लेकिन सरकार की निष्क्रियता के कारण उनके सपनों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह तुच्छ राजनीति से ऊपर उठकर इस संस्थान को जल्द से जल्द शुरू करे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनावी माहौल को देखते हुए भी अहम है। गहलोत का यह हमला न केवल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि विकास कार्यों की गति को लेकर भी बहस छेड़ता है।
इस पूरे मामले में अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
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