जयपुर फैशन शो में ‘कचरे’ से बना ग्लैमर: वेस्ट मटेरियल ड्रेस ने लूटी महफिल, महिला कारीगरों को मिला बड़ा सम्मान

जयपुर: में फैशन और परंपरा का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित फैशन शो ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत रही—वेस्ट मटेरियल से तैयार किए गए फैशन कलेक्शन, जिसने न सिर्फ दर्शकों को चौंकाया बल्कि सस्टेनेबल फैशन की नई दिशा भी दिखाई।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक अंदाज में दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद एक ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के जरिए संस्थान की 26 वर्षों की यात्रा, डिजाइन शिक्षा में नवाचार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की झलक पेश की गई। इस दौरान मौजूद शिक्षाविदों, डिजाइनरों और छात्रों ने संस्थान की उपलब्धियों की सराहना की।

वेस्ट मटेरियल बना फैशन का नया ट्रेंड

फैशन शो का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा तैयार किए गए वे कलेक्शन रहे, जो पूरी तरह वेस्ट मटेरियल से बनाए गए थे। प्लास्टिक, पेपर, जूट, कपड़े के टुकड़ों और अन्य रीसायकल सामग्री से तैयार परिधानों को स्टूडेंट्स मॉडल्स ने रैंप पर पेश किया। इन डिजाइनों ने यह साबित किया कि फैशन सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी है।

इन कलेक्शनों में रचनात्मकता और प्रयोगशीलता का अद्भुत मेल देखने को मिला। कई डिजाइनों में राजस्थान की लोक संस्कृति के रंग और टेक्सचर झलकते नजर आए, जबकि कुछ में पूरी तरह मॉडर्न और ग्लोबल अपील देखने को मिली।

परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम

छात्रों ने पारंपरिक भारतीय शिल्प को आधुनिक फैशन के साथ जोड़कर शानदार कलेक्शन प्रस्तुत किए। हैंड ब्लॉक प्रिंट, ब्लू पॉटरी, जूट शिल्प, एप्लीक वर्क, लाक शिल्प और तारकशी जैसे पारंपरिक तत्वों को समकालीन डिजाइन में ढालकर पेश किया गया।

यह प्रस्तुति इस बात का प्रमाण थी कि भारतीय हस्तशिल्प को आधुनिक बाजार के साथ जोड़ा जाए तो यह वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकता है। साथ ही, सस्टेनेबल फैशन को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक मजबूत कदम भी माना जा रहा है।

महिला कारीगरों को मिला सम्मान

कार्यक्रम के दौरान ‘वुमन इन डिजाइन: आर्टिसनल एक्सीलेंसी अवॉर्ड्स’ का आयोजन भी किया गया। इसमें विभिन्न शिल्प क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिला कारीगरों को सम्मानित किया गया। लकड़ी शिल्प, जूट, ज्वेलरी डिजाइन, ब्लॉक प्रिंटिंग और ठीकरा कला से जुड़ी महिलाओं को उनके कार्य के लिए सराहा गया।

इस सम्मान समारोह ने यह संदेश दिया कि भारतीय कारीगर, विशेष रूप से महिलाएं, देश की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

पैनल चर्चा में उभरे नए विचार

कार्यक्रम में दो प्रमुख पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। पहली चर्चा ‘क्राफ्ट कल्चर एंड क्रिएटिव इकोनॉमी’ पर केंद्रित रही, जिसमें पारंपरिक शिल्प को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने के तरीकों पर चर्चा हुई। दूसरी चर्चा ‘हेरिटेज टू मार्केटप्लेस’ विषय पर हुई, जिसमें कारीगरों के लिए स्थायी रोजगार और बाजार से जुड़ाव के नए रास्तों पर विचार किया गया।

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। उन्होंने महिला कारीगरों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है।

संस्थान की संस्थापक अर्चना सुराना ने अपने संबोधन में कहा कि डिजाइन थिंकिंग के माध्यम से परंपरा और नवाचार को जोड़ना ही उनका उद्देश्य है, जिससे कारीगर समुदाय को सशक्त बनाया जा सके।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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