घर में चल रही थी ‘मौत की फैक्ट्री’! 7 साल से फरार दो हथियार तस्कर मध्यप्रदेश से गिरफ्तार, SOG का बड़ा खुलासा

जयपुर। राजस्थान में अवैध हथियार तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसओजी ने सात साल से फरार चल रहे दो कुख्यात बदमाशों को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया है। ये दोनों अपने घर में ही पिस्टल और माउजर बनाने की अवैध फैक्ट्री चला रहे थे।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पहले पकड़े गए हथियार तस्करों ने पूछताछ में इन दोनों आरोपियों के नाम उगले थे। लगातार निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से आखिरकार एसओजी ने इन दोनों को मध्यप्रदेश के धार जिले से दबोच लिया।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

एडीजी (SOG) विशाल बंसल के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दलवीर सिंह उर्फ बल्लू उर्फ बलवीर सरदार (54) और पण्डित उर्फ अनील डावर (28) निवासी गंधवानी, जिला धार (मध्यप्रदेश) के रूप में हुई है।

दोनों आरोपी लंबे समय से अवैध हथियार निर्माण और सप्लाई के नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इनकी तलाश पिछले सात सालों से की जा रही थी। पुलिस रिकॉर्ड में दोनों वांटेड घोषित थे, लेकिन लगातार लोकेशन बदलते रहने और स्थानीय नेटवर्क की मदद से गिरफ्तारी से बचते आ रहे थे।

घर में ही बना रखी थी अवैध हथियार फैक्ट्री

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अपने ही घर को हथियार बनाने की फैक्ट्री में तब्दील कर रखा था। यहां पिस्टल और माउजर जैसे घातक हथियार तैयार किए जाते थे।

फैक्ट्री में धातु काटने की मशीनें, ड्रिलिंग उपकरण, बैरल तैयार करने के औजार, मैग्जीन फिटिंग के टूल्स और अन्य तकनीकी उपकरण मौजूद थे। एसओजी ने मौके से हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण जब्त किए हैं।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये हथियार देसी पिस्टल के रूप में तैयार किए जाते थे, लेकिन उनकी गुणवत्ता इतनी बेहतर होती थी कि वे लंबे समय तक उपयोग में लाए जा सकते थे।

पहले पकड़े गए तस्करों ने खोला था राज

इस पूरे नेटवर्क का खुलासा पहली बार जुलाई 2020 में हुआ था। तब एसओजी ने कार्रवाई करते हुए हथियार तस्कर अंकुर लाल मीणा और हेमराज मीणा को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 10 अवैध देसी पिस्टल और 2 अतिरिक्त मैग्जीन बरामद की गई थीं।

पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया था कि ये हथियार मध्यप्रदेश से बनकर आते हैं। हालांकि उस समय निर्माताओं तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया।

इसके बाद मई 2023 में एसओजी ने फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए अकलेश मीणा और श्याम बिहारी मीणा को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से 6 अवैध देसी पिस्टल और 2 अतिरिक्त मैग्जीन जब्त की गई थीं।

इन आरोपियों से गहन पूछताछ में दलवीर सिंह और अनील डावर का नाम सामने आया। तब से एसओजी की टीमें लगातार इनकी तलाश में जुटी थीं।

सात साल से फरार, ऐसे पकड़े गए

एसओजी टीम ने मुखबिर से सूचना मिलने के बाद मध्यप्रदेश में दबिश दी। आरोपियों की गतिविधियों पर कई दिनों तक नजर रखी गई। स्थानीय पुलिस के सहयोग से गंधवानी क्षेत्र में छापेमारी की गई और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

बताया जा रहा है कि आरोपी बेहद सतर्कता बरतते थे। मोबाइल फोन का सीमित इस्तेमाल, नकद लेन-देन और सीमित लोगों से संपर्क के जरिए वे पुलिस की नजर से बचते रहे।

राजस्थान में सप्लाई होता था हथियार

जांच में यह भी सामने आया है कि इनकी फैक्ट्री से बने हथियार राजस्थान के विभिन्न जिलों में सप्लाई किए जाते थे। खासकर अपराध प्रभावित क्षेत्रों में इन हथियारों की मांग अधिक थी।

अवैध पिस्टल और माउजर की कीमत बाजार में 20 हजार से 50 हजार रुपए तक होती थी। ये हथियार अक्सर लूट, हत्या, गैंगवार और अन्य संगीन अपराधों में इस्तेमाल किए जाते हैं।

SOG की रणनीति और जांच

एसओजी ने इस पूरे मामले में तकनीकी सर्विलांस, मुखबिर नेटवर्क और पूर्व गिरफ्तार आरोपियों के बयान का सहारा लिया। पिछले सात वर्षों से लगातार इन आरोपियों की लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश की जा रही थी।

अब गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह के तार किसी बड़े अंतरराज्यीय हथियार सिंडिकेट से जुड़े हैं।

कानून और कार्रवाई

अवैध हथियार निर्माण और तस्करी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। आरोपियों पर आर्म्स एक्ट और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

यदि जांच में बड़े नेटवर्क का खुलासा होता है, तो और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।

समाज के लिए खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध हथियारों की उपलब्धता अपराध दर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे हथियार आसानी से अपराधियों के हाथ लग जाते हैं और वे गंभीर वारदातों को अंजाम देते हैं।

एसओजी की इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था के लिहाज से बड़ी सफलता माना जा रहा है।

आगे की जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले सात वर्षों में इन आरोपियों ने कितने हथियार बनाए और किन-किन लोगों को सप्लाई किए। साथ ही आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

संभावना है कि बैंक खातों, संपत्ति और अन्य वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जाएगी।


निष्कर्ष:

मध्यप्रदेश में घर के अंदर चल रही अवैध हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़ राजस्थान SOG की बड़ी उपलब्धि है। सात साल से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी ने हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को उजागर किया है।

यह कार्रवाई न सिर्फ अपराध जगत के लिए चेतावनी है, बल्कि आम जनता के लिए भी राहत की खबर है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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