राजस्थान: के भरतपुर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सरकारी स्कूलों की भवन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। होली के उत्साह के बीच अचानक एक सरकारी स्कूल के क्लासरूम की छत भरभराकर गिर पड़ी। गनीमत यह रही कि शिक्षक की सतर्कता से 10 बच्चों की जान बाल-बाल बच गई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
यह हादसा सेवर थाना क्षेत्र के नगला भगत गांव स्थित महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम गवर्नमेंट स्कूल में शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे हुआ।
शनिवार को स्कूल में होली का छोटा सा आयोजन किया गया था। छात्र-छात्राओं ने रंग-गुलाल के साथ उत्सव मनाया था। हादसे से लगभग 30 मिनट पहले तक बच्चे स्कूल परिसर में होली खेल रहे थे। इसके बाद सभी बच्चे अपनी-अपनी कक्षा में लौट आए।
छठी कक्षा के कमरे में शिक्षक प्रवीण बच्चों को होली के महत्व और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने के बारे में समझा रहे थे। क्लास में कुल 10 बच्चे मौजूद थे। तभी अचानक छत की पट्टियों से चटकने की आवाज आने लगी।
पहले हल्की दरारें दिखीं, फिर कुछ ही सेकंड में वे दरारें तेजी से फैलने लगीं। शिक्षक ने खतरे को भांपते हुए बिना समय गंवाए बच्चों को बाहर निकलने का निर्देश दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिक्षक प्रवीण ने जोर से कहा—“बच्चों, तुरंत बाहर निकलो, छत गिर सकती है।” बच्चे घबराए जरूर, लेकिन शिक्षक की बात मानते हुए तेजी से बाहर निकल गए। सभी बच्चे क्लास से कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि लगभग तीन मिनट बाद तेज धमाके जैसी आवाज के साथ पूरी छत भरभराकर नीचे गिर गई।
कमरे में अचानक धूल का घना गुबार छा गया। कुछ देर तक तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। आसपास के शिक्षक और ग्रामीण मौके पर दौड़ पड़े।
अगर बच्चों को बाहर निकालने में जरा भी देरी होती, तो यह हादसा एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था।
हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पट्टियों समेत पूरी छत एक साथ नीचे गिरती है। वीडियो में धूल का घना बादल उठता दिखाई देता है और कुछ क्षणों के लिए पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो जाता है।
वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर लोग स्कूल भवनों की जर्जर हालत को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
स्कूल में कुल 28 बच्चे पढ़ते हैं। स्कूल का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक है। जिस समय हादसा हुआ, उस वक्त अधिकांश बच्चे अपनी कक्षाओं में थे।
घटना के बाद अन्य कमरों की भी जांच की गई, ताकि किसी और हिस्से में खतरा न हो। फिलहाल प्रशासन ने एहतियातन क्षतिग्रस्त कमरे को सील कर दिया है।
स्कूल की हेडमास्टर कविता देवी ने बताया कि हादसा अचानक हुआ। उनके अनुसार, यदि भवन जर्जर होता तो अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाती। “छत बिल्कुल सही थी, लेकिन शनिवार को अचानक ढह गई। हमने मामले की जांच शुरू कर दी है,” उन्होंने कहा।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि कई सरकारी स्कूलों में समय-समय पर मरम्मत नहीं होने से इस तरह के हादसों का खतरा बना रहता है।
स्कूल कमेटी (नगला भगत) के अध्यक्ष जवाहर सिंह ने बताया कि उन्हें स्कूल प्रबंधन का फोन आया था। वे मौके पर पहुंचे ही थे कि अचानक छत गिरने की आवाज आई।
“क्लास की छत में तेजी से दरारें बढ़ रही थीं। जैसे ही मैं स्कूल पहुंचा, कुछ ही देर में तेज धमाके के साथ छत गिर गई। कमरे में रेत और धूल का गुबार फैल गया था,” उन्होंने कहा।
उन्होंने शिक्षक की सतर्कता की सराहना करते हुए कहा कि अगर जरा भी देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
छठी कक्षा की एक छात्रा ने बताया कि हादसे से पहले सब कुछ सामान्य था। “हम होली खेलकर आए थे। सर हमें होली के बारे में समझा रहे थे। तभी आवाज आई। सर ने कहा कि बाहर निकल जाओ, छत गिर सकती है। हम तुरंत बाहर आ गए। फिर छत गिर गई,” उसने बताया।
बच्चों के चेहरों पर अब भी उस घटना की दहशत साफ दिखाई देती है।
यह घटना केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में सरकारी स्कूलों के भवनों की हालत चिंता का विषय रही है। समय पर मरम्मत और नियमित निरीक्षण नहीं होने से ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं।
हालांकि इस मामले में स्कूल प्रशासन का कहना है कि छत में पहले से कोई बड़ी दरार नहीं थी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या भवन की नियमित तकनीकी जांच की जाती थी?
घटना की सूचना मिलने के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाएगी कि छत अचानक क्यों गिरी—क्या निर्माण सामग्री में कमी थी, क्या पानी का रिसाव हुआ था, या फिर कोई अन्य संरचनात्मक कमजोरी थी?
रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा था या प्राकृतिक कारणों से हुआ।
घटना के बाद कई अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जब तक पूरी तरह सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक बच्चों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।
कुछ अभिभावकों ने मांग की है कि सभी कमरों की संरचनात्मक जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण किया जाए।
राजस्थान के अन्य जिलों में भी समय-समय पर स्कूल भवनों में दीवार गिरने, प्लास्टर झड़ने या छत के हिस्से टूटने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने भवनों की नियमित ऑडिटिंग बेहद जरूरी है।
यदि समय रहते जर्जर भवनों की पहचान कर ली जाए और मरम्मत की जाए, तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
भरतपुर के नगला भगत स्थित सरकारी स्कूल में हुआ यह हादसा भले ही बड़ी त्रासदी में नहीं बदला, लेकिन इसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक शिक्षक की सतर्कता ने 10 मासूम बच्चों की जान बचा ली, लेकिन क्या हर बार किस्मत और सतर्कता ही बच्चों की सुरक्षा का सहारा बनेंगी?
अब जरूरत है कि शिक्षा विभाग सभी स्कूल भवनों की व्यापक जांच कराए और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करे। क्योंकि स्कूल बच्चों के लिए ज्ञान का मंदिर हैं—खतरे का स्थान नहीं।
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