राजस्थान: की राजनीति में बड़ा संगठनात्मक कदम उठाते हुए मदन राठौड़ ने प्रदेश पदाधिकारियों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। 154 सदस्यीय इस कार्यसमिति में 12 स्थायी आमंत्रित सदस्यों को भी शामिल किया गया है। सूची जारी होते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, खासकर कांग्रेस से आए नेताओं और विवादित चेहरों को शामिल किए जाने को लेकर।
नई कार्यसमिति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू सहित कई वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई है। इसके अलावा पूर्व प्रदेशाध्यक्षों और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ को भी टीम में शामिल किया गया है।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि लंबे समय बाद कांग्रेस से बीजेपी में आए नेताओं को प्रदेश स्तर की टीम में शामिल किया गया है। गहलोत सरकार में मंत्री रहे लालचंद कटारिया को जयपुर शहर से विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। वहीं, पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
धौलपुर से पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को भी प्रदेश कार्यसमिति में जगह मिली है। मलिंगा का नाम एईएन-जेईएन से मारपीट के एक मामले में सामने आ चुका है, जिसके कारण उनका चयन राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
प्रदेश कार्यसमिति में इस बार क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। सभी जिलों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। खास बात यह है कि 20 महिला नेताओं को भी कार्यसमिति में शामिल किया गया है, जो संगठन में महिला भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रदेश कार्यसमिति का मुख्य कार्य संगठन को मजबूत करना, विस्तार की रणनीति बनाना और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करना होता है। नियमों के अनुसार साल में कम से कम एक बार प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित की जाती है, जिसमें पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों पर निर्णय लिए जाते हैं।
राजस्थान में फिलहाल संगठनात्मक रूप से 44 जिले हैं। यह संरचना उस समय की है जब राज्य में प्रशासनिक दृष्टि से 33 जिले थे। अब राज्य में प्रशासनिक रूप से 41 जिले हो चुके हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर भी नए 8 जिलों में संगठन विस्तार की संभावना है। इस विस्तार पर अंतिम मुहर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में लग सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस से आए नेताओं को जगह देना बीजेपी की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इससे पार्टी विपक्ष के मजबूत चेहरों को अपने साथ जोड़कर संगठन को और प्रभावी बनाना चाहती है। वहीं, विवादित नामों को शामिल करने से विपक्ष को हमले का मौका भी मिल सकता है।
संगठन के जानकारों के मुताबिक, नई कार्यसमिति आगामी चुनावों और संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले समय में जिला स्तर पर भी फेरबदल और विस्तार देखने को मिल सकता है।
राजस्थान बीजेपी की नई प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के साथ कांग्रेस से आए चेहरों और महिला नेताओं को शामिल कर संतुलन साधने की कोशिश की गई है। हालांकि कुछ नामों को लेकर विवाद भी है। अब नजर आगामी कार्यसमिति बैठक पर है, जहां संगठन विस्तार और रणनीतिक फैसलों पर मुहर लग सकती है।
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