भारत में LPG को लेकर अलर्ट: सरकार ने लागू की ‘रसोई गैस इमरजेंसी’, रिफाइनरी कंपनियों को तुरंत उत्पादन बढ़ाने का आदेश

मिडिल ईस्ट: में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस (LPG) सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए इमरजेंसी कदम उठाए हैं। सरकार ने देश की सभी तेल रिफाइनरी कंपनियों को आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ाएं और प्रोपेन व ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल केवल LPG बनाने के लिए करें।

सरकार का यह कदम उस आशंका को देखते हुए उठाया गया है कि यदि ईरान-इजराइल युद्ध और बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और भारत में गैस की कमी पैदा हो सकती है।


सरकार का आदेश: LPG उत्पादन बढ़ाएं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए गुरुवार देर रात यह आदेश जारी किया।

इस आदेश के तहत देश की सभी रिफाइनरी कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल केवल रसोई गैस (LPG) के उत्पादन के लिए करें।

इसका मतलब यह है कि फिलहाल इन गैसों का उपयोग किसी अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पाद या औद्योगिक काम में नहीं किया जाएगा।

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के 33.2 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई बिना किसी रुकावट के मिलती रहे।


सरकारी तेल कंपनियों को मिलेगी प्राथमिकता

सरकार के आदेश में यह भी कहा गया है कि सभी कंपनियां प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई पहले सरकारी तेल कंपनियों को दें।

इन कंपनियों में शामिल हैं—

  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)

  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)

  • भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)

इन कंपनियों के जरिए ही देशभर में घरेलू LPG सिलेंडर की आपूर्ति की जाती है।


होर्मुज रूट पर बढ़ा खतरा

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के असुरक्षित हो जाने से पैदा हुआ है।

यह समुद्री रास्ता कतर, यूएई और अन्य खाड़ी देशों से तेल और गैस सप्लाई का मुख्य मार्ग है।

रिपोर्ट्स के अनुसार—

  • 28 फरवरी को इस रास्ते से 91 जहाज गुजरे थे

  • अब यह संख्या घटकर सिर्फ 26 रह गई है

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रूट पर काफी निर्भर है।

  • भारत 50% कच्चा तेल इसी मार्ग से आयात करता है

  • जबकि 54% LNG सप्लाई भी इसी रास्ते से आती है


कतर में LNG प्लांट बंद होने से बढ़ा संकट

मिडिल ईस्ट में युद्ध की स्थिति के कारण कतर में भी ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतर के रास लफान और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी स्थित LNG प्लांट का उत्पादन फिलहाल रोक दिया गया है।

कतर भारत को गैस सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है।

भारत अपनी जरूरत की करीब 40% LNG यानी लगभग 2.7 करोड़ टन सालाना गैस कतर से आयात करता है।

इस सप्लाई में कमी आने से भारत में गैस की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।


CNG और PNG महंगे होने की आशंका

गैस सप्लाई में कमी के कारण CNG और PNG की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

सिटी गैस कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से आने वाली सस्ती गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी।

फिलहाल स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत 25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, जो लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत से दोगुनी से भी ज्यादा है।

इसका असर सीधे तौर पर—

  • CNG वाहनों

  • घरेलू PNG कनेक्शन

  • और औद्योगिक गैस उपयोगकर्ताओं

पर पड़ सकता है।


पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर

सरकार के इस फैसले का असर निजी कंपनियों, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों पर भी पड़ सकता है।

प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का इस्तेमाल आम तौर पर अल्काइलेट्स और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में भी होता है।

ये उत्पाद बाजार में LPG से ज्यादा कीमत पर बिकते हैं।

ऐसे में जब इन गैसों का इस्तेमाल केवल LPG उत्पादन के लिए किया जाएगा, तो पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।


सरकार का दावा – देश में पर्याप्त स्टॉक

हालांकि सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

इसके अलावा भारत ने पिछले कुछ सालों में ऊर्जा आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया है।

उदाहरण के लिए—

  • 2022 में भारत अपनी जरूरत का सिर्फ 0.2% तेल रूस से आयात करता था

  • जबकि फरवरी 2026 में यह बढ़कर करीब 20% हो गया


निष्कर्ष:

ईरान-इजराइल युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने समय रहते ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। LPG उत्पादन बढ़ाने और गैस के इस्तेमाल को नियंत्रित करने का उद्देश्य देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को गैस की कमी से बचाना है। हालांकि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबा चलता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की गैस कीमतों पर भी पड़ सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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