देश: की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा में उत्तर प्रदेश के शामली जिले की 23 वर्षीय आस्था जैन ने ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। एक साधारण परिवार से आने वाली आस्था की सफलता ने पूरे क्षेत्र को गर्व से भर दिया है।
कांधला कस्बे में रहने वाले आस्था के पिता अजय कुमार एक छोटी परचून की दुकान चलाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन माता-पिता ने अपनी बेटियों की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। इसी मेहनत और संघर्ष के दम पर आस्था ने देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में जगह बनाई।
UPSC सिविल सर्विस एग्जाम 2025 के फाइनल रिजल्ट में आस्था जैन ने 9वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
आस्था जैन की यह सफलता अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे वर्षों की मेहनत और निरंतर प्रयास छिपा है। उन्होंने UPSC परीक्षा को तीन बार पास किया।
पहले प्रयास में उन्हें 131वीं रैंक मिली और वह IPS बनीं।
दूसरे प्रयास में उनकी 186वीं रैंक आई।
तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया 9वीं रैंक हासिल की।
पहले प्रयास में सफलता मिलने के बाद आस्था हैदराबाद में IPS की ट्रेनिंग ले रही थीं। इसी दौरान उन्होंने दो महीने की छुट्टी लेकर अपनी तैयारी को और मजबूत किया और तीसरे प्रयास में बड़ी सफलता हासिल की।
आस्था जैन की सफलता का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि उन्होंने मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी के दम पर UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास की।
उन्होंने शुरुआती समय में दिल्ली में कुछ समय के लिए कोचिंग ली थी, लेकिन बाद में उन्होंने खुद पढ़ाई करके तैयारी जारी रखी।
आस्था का मानना है कि अगर सही रणनीति और अनुशासन के साथ पढ़ाई की जाए तो सेल्फ स्टडी भी UPSC जैसी परीक्षा में सफलता दिला सकती है।
आस्था जैन का परिवार कांधला में रहता है। परिवार में कुल चार भाई-बहन हैं और आस्था दूसरे नंबर पर हैं।
पिता – अजय कुमार (परचून की दुकान चलाते हैं)
मां – ममता जैन (गृहिणी)
बड़ी बहन – डॉक्टर
छोटी बहन – MBBS की पढ़ाई कर रही हैं
भाई – दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहा है
माता-पिता ने अपनी सभी बेटियों को बराबर अवसर दिए और उन्हें पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया।
आस्था की मां ममता जैन ने बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हर माता-पिता को अपनी बेटियों पर भरोसा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आस्था का सपना बचपन से ही जिलाधिकारी (DM) बनने का था और उसने अपनी मेहनत से यह सपना पूरा किया।
ममता जैन ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए हमेशा मेहनत की और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया। उनका मानना है कि अगर माता-पिता बच्चों पर विश्वास करें तो वे हर मुश्किल को पार कर सकते हैं।
आस्था के पिता अजय कुमार ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी बेटियों को बराबर मौका दिया। उन्होंने कभी बेटियों और बेटे में फर्क नहीं किया।
उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। यही कारण है कि आज उनकी बेटी देश की शीर्ष प्रशासनिक सेवा में पहुंच गई है।
जब उन्हें दुकान पर आस्था की सफलता की खबर मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
UPSC रिजल्ट आते ही आस्था के घर में खुशी का माहौल बन गया। रिश्तेदार और पड़ोसी लगातार उनके घर पहुंचकर बधाई दे रहे हैं।
आस्था की मां को रिश्तेदारों ने मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। पूरे इलाके में जश्न का माहौल है और लोग आस्था की सफलता को प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं।
UPSC सिविल सर्विस परीक्षा 2025 के परिणाम में उत्तर प्रदेश के 50 से ज्यादा उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है।
कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार हैं—
गोंडा के कार्तिकेय सिंह – 269वीं रैंक
लखनऊ के आदर्श पांडेय – 347वीं रैंक
जौनपुर के शुभम सिंह चंदेल – 378वीं रैंक
इसके अलावा अंबेडकरनगर, मेरठ, सहारनपुर और अलीगढ़ के कई छात्रों ने भी परीक्षा में सफलता हासिल की।
पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश से लगभग 95 छात्र IAS बने हैं।
UPSC सिविल सर्विस परीक्षा 2025 के फाइनल रिजल्ट में कुल 958 उम्मीदवारों का चयन विभिन्न सेवाओं के लिए हुआ है।
इनमें शामिल हैं:
IAS – 180 उम्मीदवार
IFS – 55 उम्मीदवार
IPS – 150 उम्मीदवार
इसके अलावा अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए भी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का चयन किया गया है।
आस्था जैन की सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
एक छोटे कस्बे की लड़की, साधारण परिवार, सीमित संसाधन और कड़ी मेहनत—इन सबके साथ आस्था ने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो सफलता जरूर मिलती है।
आज शामली ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के युवा उन्हें एक रोल मॉडल के रूप में देख रहे हैं।
आस्था जैन की सफलता सिर्फ एक परीक्षा में मिली उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह मेहनत, धैर्य और परिवार के विश्वास की कहानी है। एक किराना दुकान चलाने वाले पिता की बेटी ने देश की सबसे कठिन परीक्षा में टॉप रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए आर्थिक स्थिति नहीं बल्कि दृढ़ संकल्प और मेहनत जरूरी होती है।
उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी और यह संदेश देती है कि सही दिशा में मेहनत करने वाला हर व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है।
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