उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में शनिवार को राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल उस समय बढ़ गई जब अवध केसरी सेना के प्रमुख ठाकुर नीरज सिंह और उनकी टीम को दिल्ली जाने से पहले ही पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया। बताया जा रहा है कि वे लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पर यूजीसी के नए कानून के विरोध में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे।
पुलिस ने दोपहर करीब 12 बजे से ही ठाकुर नीरज सिंह और उनकी टीम को उनके घर पर ही रोक दिया। जानकारी के मुताबिक गोंडा जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के खिरिया गांव निवासी ठाकुर नीरज सिंह अपनी टीम के साथ दिल्ली के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। उसी दौरान पुलिस प्रशासन ने उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया।
सूत्रों के अनुसार वजीरगंज थाना पुलिस और डुमरियाडीह चौकी की टीम ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की। पुलिस ने ठाकुर नीरज सिंह के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी और उन्हें और उनकी टीम को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
बताया जा रहा है कि प्रशासन को पहले से ही जानकारी मिल गई थी कि अवध केसरी सेना की टीम दिल्ली जाकर यूजीसी कानून के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल होने वाली है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन यह कदम उठाया।
पुलिस की इस कार्रवाई में केवल ठाकुर नीरज सिंह ही नहीं, बल्कि उनकी पूरी टीम को भी रोका गया है। जानकारी के मुताबिक अवध केसरी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, राष्ट्रीय संयोजक संतोष सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट अमित मिश्रा, ब्लॉक महामंत्री बृजेश और राष्ट्रीय महामंत्री नील ठाकुर सहित कई पदाधिकारियों को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
इन सभी लोगों को दोपहर से ही हाउस अरेस्ट की स्थिति में रखा गया है और उनके घरों के बाहर पुलिस की निगरानी जारी है।
अवध केसरी सेना प्रमुख ठाकुर नीरज सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर एक वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में उन्होंने बताया कि उन्हें और उनकी टीम को दिल्ली जाने से पहले ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यूजीसी का नया कानून संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों के खिलाफ है और इस कानून का विरोध करना उनका अधिकार है।
ठाकुर नीरज सिंह ने बताया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस कानून के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में देश के कई हिस्सों से लोग शामिल होने वाले थे।
उन्होंने कहा कि उनकी टीम भी इसी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रही थी, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।
उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि उन्हें दिल्ली जाने की अनुमति दी जाए ताकि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख सकें।
ठाकुर नीरज सिंह ने यह भी कहा कि अगर उन्हें दिल्ली जाने की अनुमति नहीं दी गई तो वे बड़े आंदोलन की शुरुआत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन का यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।
अवध केसरी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह ने भी इस मामले में बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से पूरे देश में इस कानून का विरोध हुआ है, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम पर रोक भी लगा दी है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से अभी तक इस कानून को पूरी तरह खत्म करने को लेकर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है।
उन्होंने कहा कि अगर यह कानून लागू हो जाता है तो समाज में फिर से भेदभाव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए।
फिलहाल गोंडा जिले में पुलिस प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत संबंधित लोगों को फिलहाल घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई है।
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