राजस्थान: की राजधानी जयपुर में व्हीकल लोन के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जयपुर वेस्ट पुलिस ने रविवार रात कार्रवाई करते हुए 7500 रुपए के इनामी बदमाश कैलाश चंद पूनिया को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर आरोप है कि वह लोगों को आसानी से व्हीकल लोन दिलाने का झांसा देता था और उनके दस्तावेजों के जरिए फाइनेंस कंपनियों से लोन उठाकर खुद पैसे हड़प लेता था।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने 25 से ज्यादा लोगों को इसी तरह अपना शिकार बनाया। कई पीड़ितों को तब ठगी का पता चला जब उनके पास फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी नोटिस पहुंचने लगे। फिलहाल करधनी थाना पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है।
डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी कैलाश चंद पूनिया (35) कालवाड़ इलाके के सारंग का बास का रहने वाला है। उसके खिलाफ करधनी थाने में पहले से धोखाधड़ी के चार मामले दर्ज हैं। लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी पर पुलिस ने 7500 रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि कैलाश पूनिया वर्ष 2020 में ‘विनायक फाइनेंस’ नाम से एक फर्म चलाता था। वह जरूरतमंद लोगों को कम ब्याज दर पर ट्रैक्टर, बाइक और अन्य वाहनों के लिए लोन दिलाने का भरोसा देता था। इसके बाद वह ग्राहकों से ब्लैंक चेक, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज ले लेता था।
आरोपी की चालाकी इतनी शातिर थी कि वह लोगों से अंग्रेजी में लिखे 100 से 150 पन्नों वाले फॉर्म पर साइन करवा लेता था। अधिकांश पीड़ितों को यह समझ ही नहीं आता था कि वे किन कागजातों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। कुछ दिनों बाद आरोपी कहता कि उनका लोन आवेदन सिविल स्कोर खराब होने के कारण रिजेक्ट हो गया है। लेकिन असल में वह उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फाइनेंस कंपनियों से लोन उठाकर रकम खुद रख लेता था।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब जोबनेर निवासी महावीर सिंह नाथावत ने करधनी थाने में शिकायत दर्ज कराई। महावीर सिंह ने बताया कि ट्रैक्टर खरीदने के लिए उन्हें लोन की जरूरत थी। इसी दौरान वे यूएच फाइनेंशियल सर्विसेज ऑफिस पहुंचे, जहां कैलाश पूनिया और उसके साथियों ने उन्हें लोन दिलाने का भरोसा दिया।
पीड़ित से पांच ब्लैंक चेक और कई दस्तावेज लिए गए। इसके बाद महीनों तक उसे लोन प्रक्रिया चलने का आश्वासन दिया जाता रहा। बाद में आरोपी ने कह दिया कि सिविल स्कोर खराब होने के कारण लोन कैंसिल हो गया है। कुछ समय बाद महावीर सिंह के पास 32 हजार 556 रुपए की वसूली का नोटिस पहुंचा। जांच करने पर पता चला कि उनके नाम पर पहले ही लोन उठाया जा चुका था।
पुलिस का कहना है कि आरोपी ने कई एनबीएफसी कंपनियों के साथ भी धोखाधड़ी की है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अलग-अलग इलाकों में लोगों को निशाना बनाया। कई मामलों में पीड़ित ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोग थे, जिन्हें बैंकिंग और फाइनेंस प्रक्रिया की ज्यादा जानकारी नहीं थी।
रविवार रात पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कालवाड़ इलाके में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा कुल कितनी रकम की धोखाधड़ी की गई।
जयपुर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी फाइनेंस कंपनी या एजेंट को बिना पढ़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें और ब्लैंक चेक देने से बचें। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि तेजी से बढ़ते फाइनेंस सेक्टर में साइबर और दस्तावेजी धोखाधड़ी का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है ताकि वे इस तरह के शातिर ठगों के जाल में न फंसें।
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