राजस्थान: के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल से सामने आए मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद लगातार महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और दो महिलाओं की मौत के बाद अब मामला और गंभीर हो गया है। अस्पताल में भर्ती दो अन्य महिलाओं की भी किडनी फेल होने की खबर सामने आई है, जिसके बाद उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने चिकित्सा व्यवस्था, अस्पताल प्रबंधन और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हरकत में आया है। अस्पताल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑपरेटिंग सर्जन असिस्टेंट प्रोफेसर (गायनेकोलॉजी) डॉ. श्रद्धा की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। वहीं इमरजेंसी ओटी के ऑफिसर इंचार्ज डॉ. नवनीत शर्मा, ओटी सिस्टर इंचार्ज गुरजीत कौर और लेबर रूम सिस्टर इंचार्ज निमेश वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है।
मामला तब सामने आया जब 3 मई से 5 मई के बीच सिजेरियन डिलीवरी के बाद भर्ती महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। महिलाओं में यूरिन बंद होना, ब्लड प्रेशर लो होना, शरीर में संक्रमण और किडनी फेल जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिलीं। इनमें पायल और ज्योति नाम की दो महिलाओं की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि जिन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, उनकी सर्जरी एक ही इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर (EOT) में हुई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शुरुआती छह महिलाओं की हालत बिगड़ने के बावजूद उसी ओटी में दो अन्य महिलाओं का भी ऑपरेशन किया गया।
इनमें कोटा निवासी किरण की सिजेरियन डिलीवरी कराई गई, जबकि 6 महीने की गर्भवती शिरीन के बच्चेदानी में टांके लगाए गए। कुछ ही घंटों बाद इन दोनों महिलाओं की भी हालत बिगड़ गई। दोनों को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उनकी डायलिसिस की गई।
किरण के भाई लोकेश ने बताया कि उनकी बहन की पहले दो नॉर्मल डिलीवरी हो चुकी थीं। तीसरी डिलीवरी के लिए उसे 5 मई को न्यू मेडिकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। शुरुआत में डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी की बात कही, लेकिन बाद में सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के करीब 18 घंटे बाद उसका यूरिन बंद हो गया और हालत तेजी से बिगड़ने लगी।
परिवार का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने समय पर सही जानकारी नहीं दी और बाद में खुद ही निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की सलाह दे दी। अब तक इलाज में हजारों रुपए खर्च हो चुके हैं।
दूसरी ओर, 6 महीने की गर्भवती शिरीन के पति मोहम्मद आशु ने बताया कि बच्चेदानी का मुंह खुलने के कारण डॉक्टरों ने टांके लगाने की सलाह दी थी। ऑपरेशन के बाद उसकी तबीयत भी बिगड़ गई और उसे भी निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
घटना के बाद ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने बड़ा कदम उठाते हुए गायनी वार्ड में उपयोग होने वाली 24 प्रकार की दवाइयों और उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इनमें इंजेक्शन, आईवी सेट, ग्लूकोज बोतल और अन्य मेडिकल उपकरण शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग को शक है कि किसी दवा, इंजेक्शन या उपकरण में संक्रमण की वजह से मरीजों की हालत बिगड़ी हो सकती है।
ड्रग कंट्रोल विभाग ने राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) और प्रदेशभर के मेडिकल स्टोर्स को इन दवाओं की सप्लाई रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जांच के लिए सैंपल भी भेजे गए हैं।
8 मई की रात जिला कलेक्टर और एडीएम सिटी ने निजी अस्पताल पहुंचकर भर्ती महिलाओं की स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता और निशुल्क इलाज का आश्वासन दिया है।
हालांकि, घटना के चार दिन बाद भी जांच टीम अब तक यह पता नहीं लगा पाई है कि महिलाओं की हालत बिगड़ने का असली कारण क्या था। इससे मरीजों के परिजनों में गुस्सा और डर दोनों बढ़ गए हैं।
यह मामला अब पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बन चुका है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक ही ओटी में लगातार मरीजों की हालत बिगड़ने के बावजूद ऑपरेशन क्यों जारी रखे गए? क्या अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही बरती? क्या संक्रमित दवाओं या उपकरणों का इस्तेमाल हुआ?
कोटा मेडिकल कॉलेज का यह मामला सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और किडनी फेल होने जैसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे पता चलेगा कि आखिर इस दर्दनाक घटनाक्रम के पीछे असली वजह क्या थी।
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