राजस्थान: के दौसा जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी महिला अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता की मौत के बाद जमकर हंगामा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वे लगातार महिला को जयपुर रेफर करने की मांग कर रहे थे, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। आखिरकार जब महिला की हालत बेहद बिगड़ गई और उसे जयपुर भेजा गया, तब रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद गुस्साए परिजन महिला का शव लेकर दोबारा दौसा जिला अस्पताल पहुंचे और अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस ने समझाइश के बाद मामला शांत करवाया और शव को मॉर्च्युरी में रखवाया।
जानकारी के मुताबिक, जयपुर जिले के आंधी थाना क्षेत्र के श्रीरामगोपालपुरा गांव निवासी सावित्री देवी पत्नी तुलसीराम जागा को 7 मई की शाम डिलीवरी के लिए दौसा के सरकारी महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का कहना है कि भर्ती के बाद से ही महिला की तबीयत ठीक नहीं थी और उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
मृतका की ननद मधु देवी ने बताया कि परिवार के सदस्य डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से बार-बार महिला को जयपुर रेफर करने की गुहार लगाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने उनकी एक नहीं सुनी। परिजन डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन महिला को समय रहते बड़े अस्पताल नहीं भेजा गया।
परिवार का आरोप है कि जब स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई, तब मेडिकल स्टाफ ने कहा कि अगर जयपुर ले जाना है तो अपने स्तर पर लेकर जाओ, अस्पताल की ओर से रेफर नहीं किया जाएगा। इसके बाद शनिवार सुबह अचानक महिला की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उसे जयपुर रेफर किया गया। लेकिन अस्पताल से निकलने के कुछ देर बाद ही बायपास पुलिया के पास रास्ते में उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सावित्री अपने पीछे 3 साल और 6 साल की दो मासूम बेटियों को छोड़ गई है। अस्पताल परिसर में रोते-बिलखते परिजनों का दर्द हर किसी को भावुक कर गया।
मृतका के पति तुलसीराम ने कहा कि यदि समय रहते महिला को जयपुर रेफर कर दिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उधर, महिला चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. रविंद्र शर्मा ने अस्पताल प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा कि महिला भर्ती होने के बाद लगातार डॉक्टरों की निगरानी में थी। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह अचानक महिला को सांस लेने में तकलीफ शुरू हुई, जिसके बाद तुरंत जयपुर रेफर किया गया। डॉक्टर ने कहा कि मौत के सही कारणों का पता जांच के बाद ही चल पाएगा।
मामले की जानकारी मिलने के बाद कोतवाली थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और स्थिति को संभाला। थाना प्रभारी भगवान सहाय शर्मा ने बताया कि परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं के इलाज में समय पर निर्णय नहीं होने को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गंभीर मरीजों को समय रहते बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाए तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और पुलिस दोनों अपने-अपने स्तर पर जांच में जुटे हुए हैं।
दौसा के सरकारी अस्पताल में प्रसूता की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि समय पर रेफर नहीं किए जाने की वजह से महिला की जान गई। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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