राजस्थान: में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्ष 2022 की प्राध्यापक/स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। जांच में सामने आया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र लाखों रुपये लेकर बेचा गया और फर्जी डिग्री तथा बैकडेट मार्कशीट के सहारे कई अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी तक दिला दी गई।
इस हाईप्रोफाइल मामले में एसओजी ने तत्कालीन राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) सदस्य बाबूलाल कटारा, उनके भांजे विजय डामोर और पेपर माफिया अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, कृषि विज्ञान विषय का प्रश्नपत्र करीब 60 लाख रुपये में बेचा गया था।
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क की भनक एजेंसी को गोपनीय सूचना के जरिए लगी थी। शुरुआती जांच में पता चला कि हरियाणा स्थित ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से बैकडेट में बीएड और एमएससी एग्रीकल्चर की फर्जी मार्कशीट तैयार करवाई गईं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अवैध फायदा पहुंचाया गया।
5 मार्च 2026 को एसओजी थाने में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया। जांच की शुरुआत में सबसे पहले अनिता चौधरी का नाम सामने आया, जो फागी के एक सरकारी विद्यालय में कृषि विज्ञान व्याख्याता के पद पर कार्यरत थी। जांच में पाया गया कि उसने फर्जी एमएससी एग्रीकल्चर डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल की थी। पूछताछ से बचने के लिए उसके फरार होने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
इसके बाद एसओजी ने सीकर जिले के दिवराला स्थित सरकारी विद्यालय में कार्यरत कृषि विज्ञान व्याख्याता अशोक कुमार यादव को गिरफ्तार किया। जांच में खुलासा हुआ कि उसने भी ओपीजेएस यूनिवर्सिटी से फर्जी बीएड और एमएससी एग्रीकल्चर की मार्कशीट तैयार करवाई थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अशोक यादव सामान्य शैक्षणिक क्षमता का अभ्यर्थी था, लेकिन भर्ती परीक्षा में उसने कृषि विज्ञान विषय में 300 में से 239 अंक हासिल किए। वहीं सामान्य ज्ञान के पेपर में उसे सिर्फ 68 अंक मिले। दोनों पेपरों के अंकों में भारी अंतर देखकर एसओजी को संदेह हुआ और जांच की दिशा बदल गई।

पूछताछ में अशोक यादव ने स्वीकार किया कि उसने पेपर माफिया गिरोह के सदस्य विनोद रेवाड़ से 7 लाख रुपये में सॉल्व्ड प्रश्नपत्र खरीदा था। यह प्रश्नपत्र परीक्षा से एक दिन पहले यानी 10 अक्टूबर 2022 को उपलब्ध कराया गया था।
एसओजी जांच में सामने आया कि विनोद रेवाड़ को यह पेपर अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा से मिला था। इसके बाद जब अनिल मीणा को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई, तो उसने बड़ा खुलासा किया। उसने बताया कि कृषि विज्ञान का प्रश्नपत्र तत्कालीन आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा ने 60 लाख रुपये लेकर उपलब्ध कराया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, उस समय आरपीएससी में अलग-अलग विषयों के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी अलग-अलग सदस्यों को दी गई थी। कृषि विज्ञान विषय का पेपर बाबूलाल कटारा के जिम्मे था।
आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे कटारा के सरकारी आवास पर ले जाया गया, जहां उनके भांजे विजय डामोर ने उसे रजिस्टर में उतारा। बाद में यही पेपर पेपर माफिया अनिल मीणा तक पहुंचाया गया।
एसओजी को यह भी पता चला कि विजय डामोर खुद इसी भर्ती परीक्षा में भूगोल विषय का अभ्यर्थी था। उसने सामान्य ज्ञान और भूगोल के पेपर के लिए भी अलग सौदा किया था। हालांकि, जांच में दावा किया गया कि परीक्षा से पहले उसने मोबाइल पर भेजे गए पेपर नहीं देखे।
पूछताछ में अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा ने बताया कि प्रश्नपत्र की कॉपियां तैयार कर विनोद रेवाड़, भूपेंद्र सारण और सुरेश ढाका समेत गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाई गई थीं। इन लोगों ने अलग-अलग अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल कर पेपर उपलब्ध करवाए।
एसओजी अब यह जांच कर रही है कि बाबूलाल कटारा के कार्यकाल के दौरान आरपीएससी की अन्य परीक्षाओं में भी कहीं इसी तरह की अनियमितताएं तो नहीं हुईं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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