राजस्थान: की राजधानी जयपुर में पिछले तीन दिनों से जारी डॉक्टरों का आंदोलन आखिरकार रविवार को स्थगित कर दिया गया। डॉ. सोनदेव बंसल और उनके परिवार के साथ कथित मारपीट के मामले में पुलिस द्वारा विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने के बाद चिकित्सा संगठनों ने यह बड़ा फैसला लिया। आंदोलन खत्म होने के साथ ही 7 मई से बंद पड़े निजी अस्पतालों में इलाज की सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है।
यह आंदोलन डॉक्टरों की सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर शुरू हुआ था। निजी अस्पतालों के बंद रहने से हजारों मरीज प्रभावित हो रहे थे। कई गंभीर मरीजों को इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा था। अब आंदोलन स्थगित होने के बाद स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने लगी हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) राजस्थान के जोनल सचिव डॉ. अनुराग शर्मा ने बताया कि पुलिस कमिश्नर द्वारा SIT गठन की घोषणा के बाद एसएमएस हॉस्पिटल स्थित जेएमए सभागार में चिकित्सा संगठनों की अहम बैठक बुलाई गई। इस बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर समुदाय सरकार और न्यायपालिका पर भरोसा करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक डॉ. सोनदेव बंसल और उनके परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक विरोध की भावना समाप्त नहीं होगी।
जानकारी के अनुसार, डॉ. सोनदेव बंसल और उनके परिवार के साथ कथित मारपीट की घटना के बाद डॉक्टरों में भारी नाराजगी फैल गई थी। डॉक्टर संगठनों का आरोप था कि कुछ लोगों द्वारा लगातार दबाव, धमकी और भय का माहौल बनाया जा रहा था। यहां तक कि जमानत सुनवाई के दौरान भी व्यवधान उत्पन्न करने की कोशिश की गई।
इस घटना के विरोध में जयपुर के कई निजी अस्पतालों ने 7 मई से सेवाएं बंद कर दी थीं। ओपीडी, सर्जरी और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई थीं।
डॉक्टर संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि डॉक्टरों और उनके परिवारों में डर और असुरक्षा का माहौल है।
डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि पुलिस कमिश्नर ने उनकी बात गंभीरता से सुनी और तत्काल SIT गठन की घोषणा की। इसके बाद चिकित्सा संगठनों ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया।
प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम्स एसोसिएशन (PHNHA) के प्रेसिडेंट डॉ. विजय कपूर ने कहा कि डॉक्टर समुदाय को सरकार और न्यायालय पर पूरा विश्वास है। उन्होंने कहा कि यह केवल आंदोलन का स्थगन है, अंत नहीं।
उन्होंने कहा,
“जब तक डॉ. बंसल और उनके परिवार को न्याय नहीं मिल जाता, हम इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखेंगे।”
तीन दिनों से बंद निजी अस्पतालों के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कई ऑपरेशन टाल दिए गए थे और ओपीडी सेवाएं भी प्रभावित थीं। आंदोलन खत्म होने के बाद अब अस्पतालों में सामान्य गतिविधियां शुरू हो गई हैं।
रविवार शाम से ही कई अस्पतालों ने मरीजों की भर्ती और जांच प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी। लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि अब विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा।
डॉक्टरों के आंदोलन ने राज्यभर में चर्चा पैदा कर दी थी। सोशल मीडिया पर भी डॉक्टरों की सुरक्षा और अस्पतालों में कानून व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई थी। कई सामाजिक संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
अब SIT गठन के बाद सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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