तमिलनाडु: की राजनीति में एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्व डिप्टी सीएम Udhayanidhi Stalin ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि “सनातन धर्म को खत्म किया जाना चाहिए क्योंकि यह लोगों को बांटता है।”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विधानसभा में यह बयान उस समय आया जब राज्य की राजनीति पहले से ही कई बड़े घटनाक्रमों के चलते चर्चा में बनी हुई है।
उदयनिधि स्टालिन ने मुख्यमंत्री Vijay के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तमिलनाडु के पारंपरिक तमिल आह्वान गीत “तमिल थाई वाझथु” को कार्यक्रम में उचित सम्मान नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि:
“हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। तमिलनाडु के किसी भी सरकारी कार्यक्रम में तमिल थाई वाझथु को पहला स्थान मिलना चाहिए।”
दरअसल, 10 मई को हुए शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले “वंदे मातरम”, फिर “जन गण मन” और उसके बाद तमिल राज्य गीत बजाया गया था। इसी क्रम को लेकर उदयनिधि ने आपत्ति जताई।
यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की हो। इससे पहले सितंबर 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी।
उन्होंने कहा था:
“सनातन धर्म मच्छर, डेंगू, फीवर, मलेरिया और कोरोना जैसा है, जिनका सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि उन्हें खत्म करना जरूरी होता है।”
इस बयान के बाद देशभर में भारी विवाद हुआ था और कई धार्मिक संगठनों व राजनीतिक दलों ने इसका विरोध किया था।
मार्च 2025 में Supreme Court of India ने भी उदयनिधि स्टालिन को इस मामले में फटकार लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि:
“स्टालिन कोई आम आदमी नहीं हैं। उन्हें अपने बयान के परिणामों के बारे में सोचना चाहिए था।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं को अपने संवैधानिक दायित्वों और शब्दों की गंभीरता को समझना चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद उदयनिधि स्टालिन ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका विरोध हिंदू धर्म से नहीं, बल्कि “सनातन प्रथा” से है।
उन्होंने कहा था कि:
उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी DMK सामाजिक समानता और सामाजिक सुधार के सिद्धांतों पर बनी है।
जब उदयनिधि स्टालिन विधानसभा में यह बयान दे रहे थे, उस समय मुख्यमंत्री विजय भी सदन में मौजूद थे। हालांकि उन्होंने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
यह तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र था, जिसमें नए विधायकों ने शपथ ली और कई अहम फैसले भी सामने आए।
मंगलवार को तमिलनाडु की राजनीति में कई बड़े घटनाक्रम देखने को मिले:
इन सभी घटनाओं के बीच उदयनिधि का बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा।
उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया, जबकि कई यूजर्स और धार्मिक संगठनों ने इसे आस्था का अपमान करार दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आने वाले दिनों में दक्षिण भारत की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकता है।
उदयनिधि स्टालिन का सनातन धर्म पर दिया गया बयान एक बार फिर तमिलनाडु की राजनीति में विवाद का कारण बन गया है। पहले भी उनके इसी तरह के बयानों पर देशभर में बहस हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट तक उन्हें फटकार लगा चुका है। अब देखना होगा कि इस नए बयान पर राजनीतिक दलों और जनता की प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती है।
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