राजस्थान: के दौसा जिले में सोमवार शाम अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस और आधुनिक नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के अवसर पर संविदा नर्सिंग कर्मियों ने बड़ा प्रदर्शन किया। संविदा नर्सिंग अधिकारी, एएनएम और पैरामेडिकल कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शहर में कैंडल मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
यह कैंडल मार्च दौसा के नेहरू गार्डन से शुरू होकर गांधी तिराहा तक निकाला गया। मार्च में बड़ी संख्या में संविदा और स्थाई नर्सिंग कर्मियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारी हाथों में मोमबत्तियां और फ्लोरेंस नाइटिंगेल की तस्वीरें लेकर चल रहे थे। कर्मचारियों ने सरकार से स्थाई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और बोनस अंकों के आधार पर चयन करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि वे वर्षों से संविदा पर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थाई नियुक्ति नहीं मिल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने के बावजूद उनकी अनदेखी की जा रही है।
प्रदेशाध्यक्ष राकेश सैनी ने बताया कि यह आंदोलन केवल दौसा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राजस्थान में राज्य स्तरीय आंदोलन के तहत ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविदा नर्सिंग ऑफिसर, एएनएम और पैरामेडिकल कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में मेरिट के साथ 10, 20 और 30 बोनस अंक जोड़े जाने चाहिए, ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को उचित लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि कोविड महामारी समेत कई मुश्किल परिस्थितियों में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने दिन-रात सेवाएं दीं। इसके बावजूद आज भी वे नौकरी की अस्थिरता और भविष्य की चिंता से जूझ रहे हैं।
कैंडल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “स्थाई भर्ती लागू करो”, “संविदा कर्मियों को न्याय दो” और “बोनस अंक के आधार पर भर्ती करो” जैसे नारे लगाए। गांधी तिराहे पर पहुंचकर कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
जिलाध्यक्ष विजय मीणा ने कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हजारों कर्मचारी वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में लगे हुए हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में उन्हें प्राथमिकता नहीं दी जा रही। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन अंतिम निर्णय तक जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर प्रदेशभर में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जाएंगे। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो और संविदा कर्मियों को उनके अनुभव का लाभ दिया जाए।
मार्च में शामिल कई महिला नर्सिंग कर्मियों ने कहा कि वे दिन-रात अस्पतालों में मरीजों की सेवा करती हैं, लेकिन नौकरी की स्थिरता न होने के कारण मानसिक तनाव झेल रही हैं। उनका कहना था कि सरकार को स्वास्थ्य कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जल्द निर्णय लेना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रदेश संयोजक अरबाज खान, आरएनए जिलाध्यक्ष महेंद्र मीना, कर्मचारी महासंघ प्रमुख भगवान वर्मा, परमानेंट नर्सिंग ऑफिसर रामावतार मीणा, ओपी मीणा, अमरेश मीणा, समय गुर्जर, कपिल चौहान, शाहरुख खान, योगेश प्रजापत, भवानी सिंह, बाबू सरिया, शाहिद खान, कमलकांत शर्मा, पवन जैमन, चंद्रशेखर, खेमराज डाबर और नितेश नंदन सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।
कैंडल मार्च के दौरान शहरवासियों का भी ध्यान इस आंदोलन की ओर गया। कई लोगों ने स्वास्थ्य कर्मियों की मांगों का समर्थन किया और कहा कि कोरोना काल में नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इसलिए सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
यह प्रदर्शन राजस्थान में संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की बढ़ती नाराजगी का संकेत माना जा रहा है। यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं निकाला तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
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