राजस्थान सरकार की बैल प्रोत्साहन योजना, जो वर्ष 2025 के बजट में किसानों की आय बढ़ाने और खेती में सहयोग के लिए शुरू की गई थी, अब डूंगरपुर जिले के किसानों के लिए निराशा का कारण बनती जा रही है। योजना के तहत आवेदन के दौरान किसानों को आर्थिक सहायता राशि मिलने की उम्मीद थी, लेकिन लंबे इंतजार और सीमित संख्या के कारण कई किसान लाभ से वंचित रह गए हैं।
सरकार ने किसानों को बैल खरीदने और उनके रख-रखाव के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत प्रति बैल पालक किसान को प्रति वर्ष 30 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान था। इस योजना का लाभ लेने के लिए जिलेभर के किसानों ने पूरी उम्मीद के साथ अपना रजिस्ट्रेशन करवाया, लेकिन वास्तविक लाभ केवल कुछ ही किसानों को मिल पाया।
डूंगरपुर जिले में वर्ष 2025-26 के लिए बैलों से खेती योजना में 1,447 बैलों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि योजना में कुल 13,419 आवेदन प्राप्त हुए। आवेदन प्रक्रिया में किसानों को पहले ऑफलाइन और बाद में ऑनलाइन आवेदन करना पड़ा। इसके दौरान 100-100 रुपए का स्टांप शुल्क, पशु चिकित्सकों से बैलों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, कृषि भूमि की नकल और जमाबंदी सहित अन्य प्रक्रियाओं में दो से तीन माह का समय और अतिरिक्त खर्चा हुआ।
विभाग ने आवेदन की जांच पहले आओ पहले पाओ के आधार पर की और बिल ट्रेजरी को फॉरवर्ड किया। अब तक 247 किसानों के खातों में अनुदान राशि जमा हो चुकी है, जबकि बाकी के लिए इंतजार जारी है। सीमित लक्ष्य और अधिक आवेदन के कारण यह तय है कि सैकड़ों किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे।
किसानों का कहना है कि योजना के तहत समय और धन दोनों की लागत बहुत अधिक हो गई, और उम्मीद के अनुसार आर्थिक संबल नहीं मिल पाने के कारण निराशा का माहौल है। इसके बावजूद सरकार का उद्देश्य किसानों की आय में सुधार और खेती के लिए सहायता प्रदान करना ही है, और योजना का संचालन भविष्य में अधिक पारदर्शी और समयबद्ध करने की आवश्यकता बनी हुई है।
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