उदयपुर, डिजिटल डेस्क। राजस्थान में डूंगरपुर जिले के दोवड़ा थाना क्षेत्र में चोरी के आरोप में गिरफ्तार 22 वर्षीय दिलीप अहारी की पुलिस कस्टडी में मौत के मामले ने चार दिन तक जिले में तनाव का माहौल बनाए रखा। मृतक के परिजन और आदिवासी समाजजन जिला मुख्यालय पर धरने पर बैठे। इस दौरान नारेबाजी और सड़क जाम की स्थिति बन गई। लगातार वार्ता होती रही, जिसमें कई राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हुए।
मृतक की पुलिस कस्टडी में मौत से आदिवासी समाज में भारी आक्रोश फैल गया और स्थानीय प्रशासन को तत्काल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने पड़े। घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाई और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया।
इस मामले में एसपी मनीष कुमार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दोवड़ा थाना सीआई तेजकरण सिंह चाहरण, जांच अधिकारी हेडकांस्टेबल सुरेश भगोरा, देवसोमनाथ चौकी प्रभारी वल्लभराम पाटीदार, कांस्टेबल पुष्पेंद्रसिंह और माधवसिंह को निलंबित कर रिजर्व लाइन भेजा।
परिवार और प्रशासन के बीच बुधवार शाम समझौता हुआ। समझौते के तहत मृतक के पिता को गार्ड की नौकरी, छोटे भाई को संविदा नियुक्ति और परिवार को 27 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया गया। इसके बाद धरना समाप्त हुआ और मृतक का शव पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की जांच की आवश्यकता को भी उजागर किया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। वहीं, मृतक परिवार और समुदाय के लोगों को न्याय और सुरक्षा की गारंटी देने के लिए प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया।
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