झालावाड़। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में झालावाड़ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जिले की विशेष जांच टीम ने वरिष्ठ शिक्षक बनेसिंह (35), निवासी राकड़ा, तहसील अकलेरा को गिरफ्तार किया। बनेसिंह वर्तमान में बकानी ब्लॉक स्थित राजकीय मॉडल स्कूल में गणित के वरिष्ठ अध्यापक के पद पर कार्यरत थे।
जांच में सामने आया कि जिस दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने नौकरी प्राप्त की थी, वह वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। मेडिकल बोर्ड की पुनः जांच में उनकी दिव्यांगता मात्र 6 प्रतिशत पाई गई, जबकि दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना आवश्यक है। इसके अलावा, मामले में दूसरा आरोपी योगेश कुमार, जो भरतपुर जिले का निवासी और भवानीमंडी क्षेत्र के एक राजकीय विद्यालय में तृतीय श्रेणी शिक्षक है, अभी तक फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम सक्रिय है।
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने की कई गोपनीय शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। इन शिकायतों की जांच के लिए पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया। जांच के दौरान कर्मचारियों का बायोमैट्रिक सत्यापन किया गया और संभाग स्तरीय एमबीएस अस्पताल, मेडिकल कॉलेज कोटा से विशेष मेडिकल बोर्ड गठन कर पुनः चिकित्सकीय परीक्षण करवाया गया।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता आवश्यक है, लेकिन बनेसिंह की दिव्यांगता केवल 6 प्रतिशत और योगेश कुमार की दिव्यांगता शून्य प्रतिशत पाई गई। इस आधार पर दोनों को दिव्यांग आरक्षण का लाभ लेने के लिए अपात्र माना गया।
पुलिस ने मामले में संबंधित दस्तावेज़ों का गहन विश्लेषण किया, जिसमें मूल दिव्यांग प्रमाण पत्र, राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में प्रस्तुत आवेदन पत्र, परीक्षा परिणाम और नियुक्ति संबंधी दस्तावेज शामिल थे। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि प्रमाण पत्रों का दुरुपयोग कर नौकरी प्राप्त की गई।
बनेसिंह को 3 जून को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। जांच जारी है और संभावना है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी प्राप्त करने वाले अन्य लोगों के नाम भी सामने आएंगे। इस कार्रवाई को प्रदेश में दिव्यांग आरक्षण के दुरुपयोग के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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