धौलपुर जिले में मारवाड़ी को राजस्थानी भाषा घोषित करने के फैसले के खिलाफ युवा, छात्र और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आड़ में मारवाड़ी को पूरी राजस्थानी भाषा के रूप में थोपने का विरोध किया जा रहा है और फैसले को वापस लेने की मांग की जा रही है।
पूर्व विधायक सुखराम कोली के नेतृत्व में बसेड़ी उपखंड में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। बाड़ी और सैंपऊ में भी रैलियां आयोजित की गईं और मशाल जुलूस निकाला गया। आगामी दिनों में जिले के सभी ब्लॉकों में जन जागरुकता रैलियां और जिला मुख्यालय पर विरोध सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें हजारों छात्र और युवा भाग लेंगे।
2023 की रीट परीक्षा में मारवाड़ी भाषा के प्रश्नों ने पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थियों को नुकसान पहुँचाया था। स्थानीय लोग और छात्र तर्क देते हैं कि मारवाड़ी को राजस्थानी के रूप में मान्यता देने से ब्रज, मेवाती और ढूंढाढ़ी भाषाओं और संस्कृति का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा।
पूर्व विधायक कोली ने कहा कि किसी एक भाषा को बढ़ावा मिलने से क्षेत्रीय असंतुलन होगा और बच्चों के साथ न्याय नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि स्थानीय भाषाओं को अतिरिक्त विषय के रूप में विश्वविद्यालयों में शामिल किया जा सकता है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.