राजस्थान: की राजधानी जयपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल जे.के. लोन हॉस्पिटल में गुरुवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब जिला कलेक्टर संदेश नायक अचानक निरीक्षण के लिए पहुंच गए। इस औचक दौरे ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी, जहां मरीजों के परिजनों ने खुलकर अपनी परेशानियां बताईं।
सुबह करीब 11 बजे कलेक्टर अस्पताल पहुंचे और बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे ओपीडी, वार्ड और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों का निरीक्षण शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल में मौजूद सुविधाओं—जैसे कूलर, पंखे, पीने के पानी की व्यवस्था और मरीजों के लिए बैठने की जगह—का बारीकी से जायजा लिया। खासतौर पर गर्मी को देखते हुए उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों के लिए पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल के एनआईसीयू (NICU), जनरल वार्ड और लैब का भी दौरा किया। यहां उन्होंने भर्ती बच्चों के परिजनों से सीधे बातचीत कर अस्पताल की सेवाओं पर फीडबैक लिया। इस बातचीत में कई चौंकाने वाली शिकायतें सामने आईं।
परिजनों ने बताया कि अस्पताल के दवा काउंटर पर अक्सर जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होतीं। कई बार दवाइयां होने के बावजूद स्टाफ उन्हें देने में आनाकानी करता है। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि कई बार कर्मचारी मरीजों और उनके परिजनों से ठीक तरीके से बात नहीं करते, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर संदेश नायक ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. आर.एम. सेहरा को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मरीजों को दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कलेक्टर ने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी दवा काउंटरों पर पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं और उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही, स्टाफ के व्यवहार को सुधारने के लिए भी सख्त कदम उठाने को कहा गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी तरह की शिकायत मिलती है, तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, कलेक्टर ने अस्पताल परिसर में उन जगहों की पहचान करने को कहा जहां मरीजों के परिजन ज्यादा समय बिताते हैं। इन स्थानों पर कूलर, पंखे और पीने के पानी की बेहतर व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। जहां पहले से वॉटर कूलर या आरओ मशीनें लगी हैं लेकिन काम नहीं कर रहीं, उन्हें तुरंत ठीक कराने को कहा गया।
यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कलेक्टर का यह औचक निरीक्षण प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है और यह संदेश देता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण के बाद यह साफ हो गया कि अस्पताल में सुधार की काफी गुंजाइश है। हालांकि, कलेक्टर के निर्देशों के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी और उनकी शिकायतों का समाधान होगा।
जेके लोन हॉस्पिटल का यह औचक निरीक्षण कई खामियों को उजागर कर गया। दवाइयों की कमी और स्टाफ के व्यवहार जैसी समस्याएं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती हैं। हालांकि, प्रशासन की सख्ती के बाद सुधार की उम्मीद जरूर जगी है।
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