राजस्थान: में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 65 से बढ़ाकर 70 साल करने के प्रस्ताव ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस प्रस्ताव के सामने आते ही Rajasthan Medical College Teachers Association ने इसका कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले से युवा डॉक्टरों के करियर पर गंभीर असर पड़ेगा और उनके लिए अवसर कम हो जाएंगे।
यह प्रस्ताव फिलहाल चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया है, लेकिन इसके खिलाफ आवाजें तेज होती जा रही हैं। RMCTA ने प्रमुख शासन सचिव को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धीरज जैफ ने कहा कि वर्तमान में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 65 साल निर्धारित है, जबकि प्रशासनिक पदों पर वे 62 वर्ष तक ही कार्य कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में पहले से ही पर्याप्त संख्या में प्रोफेसर और वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद हैं, इसलिए रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है।
डॉ. जैफ के अनुसार, इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा नुकसान उन युवा डॉक्टरों को होगा जो अभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ डॉक्टर लंबे समय तक पदों पर बने रहेंगे, तो नए डॉक्टरों के लिए स्थायी नियुक्ति के अवसर कम हो जाएंगे।
उन्होंने आगे बताया कि मेडिकल शिक्षा विभाग में प्रमोशन की प्रक्रिया टाइम-बाउंड (DACP स्कीम) के तहत होती है। इस व्यवस्था में जब तक कोई वरिष्ठ प्रोफेसर रिटायर नहीं होता, तब तक उनके नीचे के पद खाली नहीं होते। इसका सीधा असर सहायक आचार्य (Assistant Professor) जैसे पदों पर पड़ता है, जो युवा डॉक्टरों के लिए प्रवेश का मुख्य रास्ता होता है।
इस पूरे विवाद में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। National Medical Commission के नियमों के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र 70 साल तक हो सकती है। हालांकि, यह नियम वर्तमान में मुख्य रूप से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में लागू है। सरकारी संस्थानों में राज्य सरकारें अपनी नीतियों के अनुसार उम्र सीमा तय करती हैं।
राजस्थान सरकार ने पहले ही 2018 में मेडिकल शिक्षकों की रिटायरमेंट उम्र 62 से बढ़ाकर 65 साल कर दी थी। अब इसे और बढ़ाकर 70 साल करने के प्रस्ताव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
RMCTA का आरोप है कि यह प्रस्ताव कुछ ऐसे डॉक्टरों के हित में लाया गया है, जो या तो रिटायर होने वाले हैं या पहले से रिटायर होकर दोबारा सेवाएं दे रहे हैं। एसोसिएशन का मानना है कि यह कदम व्यक्तिगत हितों से प्रेरित हो सकता है, न कि व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था के सुधार के लिए।
दूसरी ओर, इस प्रस्ताव के समर्थक यह तर्क दे सकते हैं कि अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं लंबे समय तक उपलब्ध रहने से मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां वरिष्ठ डॉक्टरों का अनुभव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि अनुभव के साथ-साथ नए डॉक्टरों को भी अवसर देना जरूरी है, ताकि सिस्टम में नई ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों का समावेश हो सके।
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाएगा। लेकिन जिस तरह से डॉक्टरों का एक बड़ा वर्ग इसके खिलाफ खड़ा हो गया है, उससे यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी गरमा सकता है।
डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव जहां एक ओर अनुभव का लाभ लेने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर यह युवा डॉक्टरों के भविष्य के लिए चुनौती बन सकता है। सरकार को इस पर संतुलित निर्णय लेना होगा, ताकि न तो स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हों और न ही नई पीढ़ी के डॉक्टरों के अवसर सीमित हों।
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