राजस्थान: के अजमेर में सामने आए चर्चित ‘स्याही कांड’ ने पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। थाने के भीतर पुलिस हिरासत में मौजूद एक कांग्रेस नेता पर स्याही फेंकने की घटना के बाद अब प्रशासन हरकत में आया है और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।
मामले में हर्षवर्धन अग्रवाल ने तुरंत संज्ञान लेते हुए गंज थाना प्रभारी महावीर सिंह, एक संतरी और ड्यूटी ऑफिसर को प्रथम दृष्टया लापरवाही मानते हुए लाइन हाजिर कर दिया है। इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
यह घटना गुरुवार, 30 नवंबर की बताई जा रही है, जब कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ से जुड़े पदाधिकारी पीयूष सुराणा को पुलिस ने एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के चलते हिरासत में लिया था। आरोप था कि उन्होंने रेखा गुप्ता के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी की थी।
यह कार्रवाई एक भाजपा पदाधिकारी की शिकायत पर की गई थी। पुलिस ने सुराणा को हिरासत में लेकर गंज थाने में रखा था। इसी दौरान भाजपा महिला मोर्चा की कुछ पदाधिकारी और कार्यकर्ता थाने पहुंचीं और विरोध प्रदर्शन करने लगीं।
प्रदर्शन के दौरान अचानक स्थिति बिगड़ गई और भाजपा महिला कार्यकर्ताओं ने थाने के अंदर ही कांग्रेस नेता पीयूष सुराणा पर स्याही फेंक दी। यह पूरी घटना पुलिस की मौजूदगी में हुई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे।
घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इसे कानून व्यवस्था की बड़ी चूक बताया और पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाया। वहीं, भाजपा पक्ष ने इसे जनाक्रोश का परिणाम बताया।
घटना के बाद पीयूष सुराणा के छोटे भाई श्रेयांश सुराणा ने भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारियों के खिलाफ गंज थाने में मामला दर्ज कराया। दूसरी ओर, भाजपा पक्ष की ओर से भी शिकायत दर्ज की गई है।
हिमांशु जांगीड़ ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से दर्ज मामलों की जांच की जा रही है। जांच की जिम्मेदारी दरगाह थाना प्रभारी दिनेश जीवनानी को सौंपी गई है।
इस पूरे विवाद की जड़ एक कथित फेसबुक पोस्ट है, जिसमें दिल्ली की मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। हालांकि, पीयूष सुराणा ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा है कि उस पोस्ट से उनका कोई संबंध नहीं है और उनकी आईडी का दुरुपयोग किया गया है।
पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है और सोशल मीडिया अकाउंट की तकनीकी जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पोस्ट किसने और कैसे किया।
थाने के अंदर इस तरह की घटना होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है, और इस मामले में स्पष्ट रूप से चूक हुई है।
इसी को देखते हुए एसपी द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई है, ताकि संदेश दिया जा सके कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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