वॉशिंगटन: डीसी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक बयान पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने संकेत दिया कि वे अगले 8-9 साल तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं। उनके इस बयान पर वहां मौजूद लोग पहले हंस पड़े, लेकिन ट्रम्प ने तुरंत कहा कि वह मजाक नहीं कर रहे हैं और अभी उनके पास बहुत काम बाकी है।
ट्रम्प ने कहा,
“मैं अभी सिर्फ शुरुआत में हूं। मुझे काम करना पसंद है और देश के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है।”
उनके इस बयान ने अमेरिका में तीसरे कार्यकाल और संविधान संशोधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
अगले महीने 80 साल के होने जा रहे डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी उम्र को लेकर भी मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा,
“मैं बुजुर्ग नहीं हूं। मैं बुजुर्ग से कहीं ज्यादा जवान हूं। मुझे आज भी वैसा ही महसूस होता है जैसा 50 साल पहले होता था।”
ट्रम्प के इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोग मुस्कुराते नजर आए। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प ने एक बार फिर अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह लंबे समय तक सक्रिय राजनीति में बने रहना चाहते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने तीसरी बार राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई हो। इससे पहले भी वे कई मौकों पर संकेत दे चुके हैं कि वह दो कार्यकाल के बाद भी सत्ता में बने रहना चाहते हैं।
अमेरिका में मौजूदा संविधान के तहत कोई भी व्यक्ति दो बार से ज्यादा राष्ट्रपति नहीं बन सकता। यह नियम 1951 में अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के जरिए लागू किया गया था।
इस नियम के अनुसार कोई भी व्यक्ति अधिकतम दो बार ही राष्ट्रपति चुना जा सकता है। इससे पहले अमेरिका में ऐसा कोई संवैधानिक प्रतिबंध नहीं था।

ट्रम्प के करीबी रिपब्लिकन सांसद एंडी ओगल्स ने जनवरी 2025 में अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक बिल पेश किया था। इसका उद्देश्य संविधान में बदलाव कर ट्रम्प के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता खोलना था।
प्रस्ताव में कहा गया था कि जो व्यक्ति लगातार दो बार राष्ट्रपति नहीं रहा है, वह तीसरी बार चुनाव लड़ सकता है। चूंकि ट्रम्प 2020 में चुनाव हार गए थे, इसलिए इस संशोधन के बाद वे फिर चुनाव लड़ने के योग्य हो सकते थे।
हालांकि यह बिल आगे नहीं बढ़ पाया और वोटिंग तक नहीं पहुंच सका।
विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका में संविधान बदलना बेहद कठिन प्रक्रिया है।
इसके लिए पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट दोनों में दो-तिहाई बहुमत से बिल पास कराना होता है। वर्तमान में रिपब्लिकन पार्टी के पास इतना बहुमत नहीं है।
सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में से केवल 52 सीटें हैं, जबकि हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं। संविधान संशोधन के लिए यह संख्या काफी कम मानी जाती है।
इसके बाद भी प्रक्रिया खत्म नहीं होती। संशोधन को लागू करने के लिए अमेरिका के 50 राज्यों में से कम से कम 38 राज्यों की मंजूरी जरूरी होती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में ऐसा होना लगभग असंभव है।
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रम्प को तीसरे कार्यकाल का रास्ता नहीं मिलता, तो वे सत्ता में बने रहने के लिए दूसरा मॉडल अपना सकते हैं।
हैमिल्टन कॉलेज के प्रोफेसर फिलिप क्लिंकनर का मानना है कि ट्रम्प 2028 में उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं और किसी करीबी नेता को राष्ट्रपति बनाकर पर्दे के पीछे से सत्ता चला सकते हैं।
विशेषज्ञ इसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं। पुतिन ने 2008 में संवैधानिक बाध्यता के कारण दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बनाया था, जबकि खुद सत्ता के केंद्र में बने रहे।
कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ट्रम्प भविष्य में अपने परिवार के किसी सदस्य को भी राजनीति में आगे बढ़ा सकते हैं।
ट्रम्प के बयान के बाद उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर कई रिपब्लिकन समर्थकों ने कहा कि अमेरिका को अभी भी ट्रम्प के नेतृत्व की जरूरत है।
वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी और ट्रम्प विरोधियों ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि अमेरिकी संविधान की मूल भावना सत्ता के संतुलन पर आधारित है और किसी भी नेता को लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
डोनाल्ड ट्रम्प का “8-9 साल और राष्ट्रपति रहने” वाला बयान अमेरिकी राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है। हालांकि संविधान में बदलाव आसान नहीं है, लेकिन ट्रम्प लगातार तीसरे कार्यकाल की इच्छा जताकर राजनीतिक माहौल को गर्म बनाए हुए हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिका की राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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