अजमेर से लोकसभा सांसद और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की एक कमर्शियल कृषि योजना के तहत लगभग 99 लाख रुपये से अधिक की सब्सिडी मिलने का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। यह सब्सिडी डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव स्थित उनके निजी पॉलीहाउस प्रोजेक्ट के लिए स्वीकृत की गई थी, जिसकी कुल लागत लगभग 1.99 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, इस परियोजना में मंत्री ने लगभग 49.8 लाख रुपये अपनी निजी पूंजी से लगाए हैं, जबकि शेष राशि एचडीएफसी बैंक से लोन के रूप में ली गई है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इस परियोजना को प्रशासनिक स्तर पर मात्र 14 दिनों में प्रारंभिक मंजूरी मिल गई थी और बाद में इसे फाइनल अप्रूवल के बाद सब्सिडी जारी कर दी गई।
विवाद की मुख्य वजह यह है कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आता है और मंत्री स्वयं इस विभाग से जुड़े पद पर हैं, जिससे विपक्ष ने इसे हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला बताया है। विपक्ष का आरोप है कि यह नैतिक रूप से गलत है, जबकि मंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे पूरी तरह नियमों के तहत लिया गया लाभ बताया है।
मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि वे लंबे समय से किसान हैं और खेती उनका पारिवारिक व्यवसाय है, जिसे वे राजनीतिक पद पर रहते हुए भी जारी रख सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह सब्सिडी MIDH योजना के तहत सामान्य प्रक्रिया के अनुसार दी गई है और इसमें किसी प्रकार का दुरुपयोग नहीं हुआ है।
यह मामला अब राजनीतिक और नैतिक बहस का केंद्र बन गया है, जहां एक ओर विपक्ष सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर मंत्री इसे एक वैध और पारदर्शी कृषि निवेश बता रहे हैं।
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