देहदान का संकल्प लेते हुए दंपती ने कहा कि जीवन के बाद भी यदि उनका शरीर किसी मरीज, मेडिकल छात्र या चिकित्सा अनुसंधान के काम आ सके तो इससे बड़ा मानव सेवा का कार्य कोई नहीं हो सकता। उनका मानना है कि समाज में अंगदान और देहदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें।
इस अवसर पर परिवार के सदस्यों और समाज के लोगों ने भी इस पहल की प्रशंसा की। विधायक आदूराम मेघवाल ने इसे मानवता की सेवा से जुड़ा अत्यंत प्रेरणादायी निर्णय बताते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और दूसरों को भी जनकल्याण के लिए आगे आने की प्रेरणा देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में शरीर रचना (एनाटॉमी) की पढ़ाई और विभिन्न चिकित्सकीय अनुसंधानों के लिए देहदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे संकल्प न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाते हैं, बल्कि समाज में मानव सेवा और जागरूकता का भी सशक्त संदेश देते हैं। भवानीशंकर मेघवाल और उनकी पत्नी की यह पहल निश्चित रूप से दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
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