राजस्थान में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) और एनीमिया प्रबंधन को लेकर व्यापक अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत प्रत्येक गर्भवती महिला की शुरुआती चरण में स्वास्थ्य जांच, हीमोग्लोबिन टेस्ट, रक्तचाप, शुगर और अन्य आवश्यक जांच की जाएगी ताकि जोखिम वाले मामलों की समय पर पहचान हो सके।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि आशा सहयोगिनी, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग करें। जिन महिलाओं में गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह या अन्य जटिलताएं पाई जाएंगी, उन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में चिन्हित कर नियमित निगरानी और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही सभी मामलों का रिकॉर्ड PCTS पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर पहचान, नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड की उपलब्धता और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश की हर गर्भवती महिला को सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं समय पर मिल सकें।
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