एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को हाल ही में झालावाड़ के नावाड़ पुलिस ने मानव तस्करी और देह व्यापार के एक गिरोह के चंगुल से मुक्त कराया। पीड़िता ने बताया कि गरीबी और परिवार की आर्थिक मजबूरी के कारण वह मुंबई जाने का लालच में आ गई। उसके परिवार में पांच भाई और छह बहनें हैं, और पिता शराब की लत के कारण गंभीर रूप से बीमार थे।
परिचित रामकन्याबाई, जिसे बस्ती में 'बुआजी' कहा जाता था, ने उसे पहले बूंदी में घरेलू काम करने और बाद में मुंबई में नौकरी और बेहतर कमाई का झांसा देकर मानव तस्करी के जाल में फंसा दिया। मुंबई पहुंचने पर उसे और अन्य लड़कियों को एक फ्लैट में रखा गया। वहां हनीफ नामक व्यक्ति उन्हें पुलिस से बचने और उम्र/पहचान बदलकर बताने की ट्रेनिंग देता था।
पीड़िता को शुरुआत में डांस बार में भेजा गया, लेकिन जल्दी ही ग्राहकों के साथ होटलों और कमरों में भेजा जाने लगा। विरोध या रोने पर धमकियां दी जाती थीं। घरवालों से संपर्क करने की अनुमति नहीं थी। हाल ही में पुलिस कार्रवाई के दौरान पीड़िता को मुक्त किया गया। उसने बताया कि जिस महिला को उसने 'बुआ' समझा, वही उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी सौदागर निकली।
पुलिस कार्रवाई से उसे नई जिंदगी मिली, लेकिन वह अब भी अपने खोए हुए बचपन के बारे में सोचती है।
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