जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर जिले की झीलों, जलस्रोतों, नहरों, फीडर चैनलों और उनसे जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, प्रबंधन और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित समाचारों का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। न्यायाधीश डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायाधीश रेखा बोराणा की अवकाशकालीन खंडपीठ ने 25, 29 और 31 मई को प्रकाशित समाचार और तस्वीरों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया।
कोर्ट ने कहा कि उदयपुर की झीलों का संरक्षण और प्रदूषण से सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है ताकि पारिस्थितिकीय संतुलन बना रहे। पिछोला, फतेहसागर, स्वरूप सागर, रंग सागर, रूप सागर, दूध तलाई, गोवर्धन सागर और बड़ी झील सहित अन्य जलस्रोतों पर अतिक्रमण, सीमांकन अस्पष्टता, सीवरेज और अपशिष्ट जल के प्रवाह तथा विकास गतिविधियों के दबाव को रोकने के आदेश दिए गए।
सभी जलस्रोतों में बिना उपचारित सीवरेज, औद्योगिक अपशिष्ट, नगरपालिका कचरा और निर्माण मलबे के प्रवाह को रोका जाएगा। न्याय मित्र के रूप में अविन छंगाणी, मुदित नागपाल और शुभम ओझा नियुक्त किए गए हैं। अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
कोर्ट ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि झीलों और जलस्रोतों का विस्तृत विवरण, भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रफल, स्वामित्व, पारिस्थितिकीय स्थिति, जल गुणवत्ता, सीमांकन, जीआईएस मैपिंग, डिजिटल रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख, अतिक्रमण और अवैध निर्माण की स्थिति रिपोर्ट, जल संरक्षण और पुनर्स्थापन कार्ययोजना, फीडर चैनल और कैचमेंट क्षेत्रों का संरक्षण तथा जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के अध्ययन की जानकारी प्रस्तुत करें। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने का निर्देश दिया गया है।
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