देबारी–उमरड़ा रेल दोहरीकरण: 467 करोड़ की परियोजना से उदयपुर रेल नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार

उदयपुर में रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में उत्तर-पश्चिम रेलवे (निर्माण संगठन) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देबारी–उमरड़ा (24.78 किमी) रेल लाइन के दोहरीकरण (डबल ट्रैक) की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार के राजपत्र में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

करीब 467 करोड़ रुपये की इस परियोजना के तहत उदयपुर और गिर्वा तहसील क्षेत्र की कुल 9.7770 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। इसमें निजी, सरकारी तथा उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) की भूमि शामिल है। अधिग्रहण के दायरे में रेबारियों की ढाणी, देबारी, झरनों की सराय, भैंसड़ाखुर्द, डांगियों की पचोली, धोली मगरी, बेड़वास, मादड़ी पुरोहितान, आयड़, पानेरियों की मादड़ी, सवीना, एकलिंगपुरा और खेड़ा कानपुर सहित कई क्षेत्र शामिल हैं।

भूमि अधिग्रहण के बाद रेलवे अधिनियम के तहत प्रभावित लोग 30 दिनों के भीतर अपनी लिखित आपत्तियाँ कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत कर सकेंगे, जिनके साथ ठोस आधार देना अनिवार्य होगा।

इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा घाटावाली मां मंदिर के समीप प्रस्तावित 550 मीटर लंबी नई रेल टनल का निर्माण है, जो मौजूदा सुरंग के समानांतर बनाई जाएगी। यह निर्माण कार्य इस पूरे दोहरीकरण प्रोजेक्ट की तकनीकी दृष्टि से एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

दोहरीकरण के बाद इस रूट पर ट्रेनों की क्रॉसिंग के लिए आउटर पर लंबे समय तक रुकने की समस्या समाप्त हो जाएगी। इससे उदयपुर आने-जाने वाली यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा, मालगाड़ियों का संचालन सुचारू रहेगा और बढ़ते रेल यातायात का दबाव कम होगा। साथ ही इस रूट पर नई यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।

रेल मंत्रालय ने इस परियोजना को दिसंबर 2025 में मंजूरी दी थी, जिसके बाद सर्वे और प्रारंभिक प्रक्रियाएँ पूरी कर ली गईं। अब भूमि अधिग्रहण के साथ ही निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है और इसे तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी के साथ उत्तर-पश्चिम रेलवे अपने नेटवर्क पर आधुनिक तकनीक भी लागू कर रहा है, जिसमें ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और मल्टी सेक्शन एक्सल काउंटर सिस्टम शामिल हैं। इससे ट्रैक की क्षमता बढ़ेगी, सिग्नल फेल की घटनाएँ कम होंगी और एक ही ट्रैक पर कई ट्रेनों का सुरक्षित संचालन संभव हो सकेगा। इस तकनीक के विस्तार से रेल संचालन अधिक तेज, सुरक्षित और समयबद्ध बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Written By

Chanchal Rathore

Desk Reporter

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