सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रह रहा था और चाय की दुकान चलाकर अपना गुजारा कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, उसने घटना से करीब तीन दिन पहले ही दुकान किराए पर ली थी। शुरुआती जांच में उसके तनाव में होने की बात सामने आई है। मौके से फिलहाल कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
सुरेंद्र कोली को दुकान किराए पर दिलवाने वाले धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया कि घटना से एक दिन पहले सुरेंद्र काफी तनाव में नजर आ रहा था। धर्मेंद्र के मुताबिक, परिवार में किसी बच्चे का जन्मदिन था और सुरेंद्र ने कहा था कि उसके पास पैसे नहीं हैं।
धर्मेंद्र ने बताया कि इसके बाद उन्होंने सुरेंद्र को 2 हजार रुपये दिए थे। उनके अनुसार, उस समय सुरेंद्र काफी परेशान था। अगले दिन उसकी आत्महत्या की खबर सामने आई।
जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में अपनी पहचान बदलकर 'सादराम' नाम से रहना शुरू किया था। शुरुआती जांच के दौरान पुलिस को उसके पास पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं मिले, जिससे उसकी पहचान करने में परेशानी हुई।
बाद में उसके सामान की तलाशी के दौरान आधार कार्ड मिला। आधार कार्ड के आधार पर पुलिस ने उसकी पहचान निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली के रूप में की।
सुरेंद्र कोली का नाम वर्ष 2006 में सामने आए निठारी हत्याकांड से जुड़ा था। इस मामले में बच्चों और महिलाओं के लापता होने तथा हत्या के आरोपों ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।
हालांकि, बाद में अदालतों में चले मामलों में उसे राहत मिली और पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट से भी उसे बरी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद वह हरिद्वार में रह रहा था।
घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। परिवार के लोगों को भी सूचना दे दी गई है। पुलिस सुरेंद्र कोली की आखिरी गतिविधियों, उसके संपर्कों और मानसिक स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।
फिलहाल आत्महत्या के पीछे आर्थिक परेशानी या अन्य कोई कारण था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
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