विश्वेंद्र सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि जिस पार्टी ने करीब 60 साल तक देश पर शासन किया, उसकी राजस्थान में आज ऐसी स्थिति हो गई है कि कोई जिम्मेदारी लेने वाला नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नेता जिस डाल पर बैठे हैं, उसी को काटने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वाभिमानी लोगों का पार्टी में दम घुट रहा है। प्रदेश कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं को अहंकार और गलतफहमी की राजनीति से बाहर निकलना चाहिए, अन्यथा पार्टी को और नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के सम्मान में कमी, युवाओं के मार्गदर्शन की व्यवस्था नहीं होने और नारी शक्ति को आगे बढ़ाने के लिए ठोस सोच के अभाव का मुद्दा भी उठाया। साथ ही कांग्रेस आलाकमान से इन विषयों पर ध्यान देने की अपील की।
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने हमेशा जनता की आवाज को प्राथमिकता दी है और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनसेवा की है। विधायक, सांसद और मंत्री सहित सार्वजनिक जीवन में मिली जिम्मेदारियों को उन्होंने ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता के साथ निभाने की बात कही।
उन्होंने लिखा कि झूठ, फरेब और बेईमानी से दूर रहकर स्वच्छ राजनीति करना उनके सिद्धांतों का हिस्सा रहा है। उनके अनुसार, उन्होंने हमेशा अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसले लिए और अपने स्वाभिमान, उसूलों तथा आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया।
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वह पहले भी कार्यकर्ताओं के बीच रहे हैं और आगे भी उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने चापलूसी से दूर रहने और जनहित में काम करते रहने की बात दोहराई।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि उनके लिए कार्यकर्ताओं का सम्मान और जनता की सेवा सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन को खुली किताब बताते हुए कहा कि उनके आचरण और सिद्धांतों में कोई अंतर नहीं रहा है और आगे भी वह इसी रास्ते पर चलेंगे।
पत्र के अंत में विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें किसी से कोई अपेक्षा नहीं है। उन्होंने अपना जीवन जनता की सेवा में बिताने की बात कही और आगे भी अंतिम सांस तक जनहित में काम करते रहने का संकल्प दोहराया।
उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला जनता पर छोड़ते हुए कहा कि जनता का जो भी आदेश होगा, उसे वह स्वीकार करेंगे। साथ ही उन्होंने अपने इष्ट श्री गिरिराज महाराज से सत्य की राह पर बने रहने और अपनों का साथ बनाए रखने की प्रार्थना की।
विश्वेंद्र सिंह के इस पत्र से राजस्थान कांग्रेस के भीतर चल रही नाराजगी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब इस मामले में प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और पार्टी आलाकमान की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।
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