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फोटो: दिल्ली में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित तस्वीरें। प्रकाशन से पहले फोटो की पहचान और तारीख की पुष्टि करें।
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिए जाने के करीब 23 घंटे बाद रिहा कर दिया गया। कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उनकी रिहाई के साथ एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त रखी है। इस बीच, CJP ने रविवार को एक बार फिर प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है।
CJP के तीनों नेताओं को शनिवार को दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद उनकी हिरासत को लेकर पार्टी की ओर से सवाल उठाए गए। रविवार को तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उनकी रिहाई के आदेश दिए गए।
रिहाई के दौरान एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त रखी गई। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन को लेकर विवाद और तेज हो गया है।
CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध जता रही है। पार्टी की प्रमुख मांगों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कथित अनियमितताओं की जांच की मांग शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। इन आरोपों को लेकर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों पर बहस तेज हुई है।
तीनों नेताओं की रिहाई के बावजूद CJP ने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया है। पार्टी ने रविवार को जंतर-मंतर पर फिर से प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है और आवाजाही पर प्रतिबंध या मार्ग परिवर्तन की स्थिति बन सकती है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, हिरासत और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आगे क्या रणनीति अपनाते हैं और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल, तीनों नेताओं की रिहाई के बाद भी CEC के खिलाफ विरोध जारी रहने के संकेत हैं। चुनाव आयोग से जुड़ी मांगों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर यह विवाद आगे भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रह सकता है।
फोटो 1: जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था
फोटो 2: प्रदर्शन के दौरान पुलिस की तैनाती
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