राजस्थान में फर्जी डिग्री के सहारे डॉक्टर बनने और मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी MBBS डिग्री और मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टर के रूप में काम करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ कि इनमें से एक आरोपी केवल 8वीं पास है। वह पहले एक अस्पताल में ओपीडी काउंटर पर मरीजों की पर्चियां काटता था, लेकिन बाद में उसी अस्पताल को खरीदकर खुद डॉक्टर बन बैठा। आरोप है कि वह डॉक्टरों की टीम के साथ ऑपरेशन भी करने लगा था।
SOG के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सीकर निवासी पंकज यादव (30) और जालोर निवासी नानजी राम चौधरी (45) के रूप में हुई है। पंकज को हरियाणा के कैथल से, जबकि नानजी राम को जालोर के रानीवाड़ा से गिरफ्तार किया गया। मामले में सात अन्य लोगों के खिलाफ भी नामजद FIR दर्ज की गई है।
जांच में सामने आया कि नानजी राम चौधरी ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच रानीवाड़ा के एक अस्पताल में ओपीडी काउंटर पर काम किया। यहां वह मरीजों की पर्चियां काटता था। इसके बाद उसने कपड़े की दुकान पर भी काम किया। आरोप है कि वर्ष 2015-16 में उसने उसी अस्पताल को खरीद लिया और उसका नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल कर दिया।
SOG के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर मेडिकल डिग्री और गायनेकोलॉजी से संबंधित डिप्लोमा हासिल किया। इसके बाद राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराकर डॉक्टर के रूप में काम करने लगा। जांच में उसके DGO डिप्लोमा, अलॉटमेंट लेटर, पासिंग सर्टिफिकेट और अटेम्प्ट सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए।
जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने अस्पताल को 100 बेड की सुविधा वाला अस्पताल बनाया और डॉक्टरों की टीम के साथ ऑपरेशन करने लगा। अब SOG इस बात की भी जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसे मेडिकल पंजीकरण कैसे मिला और इस पूरे मामले में किन लोगों ने उसकी मदद की।
मामले में गिरफ्तार दूसरा आरोपी पंकज यादव वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई करने गया था। भारत लौटने के बाद वह विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए जरूरी परीक्षा FMGE में छह बार असफल रहा।
SOG की जांच के मुताबिक, इसके बाद उसने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज के नाम से कथित फर्जी MBBS डिग्री और मार्कशीट तैयार करवाई। इसके साथ ही बिहार मेडिकल काउंसिल के फर्जी पंजीकरण दस्तावेजों के जरिए राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन हासिल करने का आरोप है।
संबंधित मेडिकल कॉलेज और बिहार मेडिकल काउंसिल से सत्यापन कराने पर उसके दस्तावेजों और पंजीकरण की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद मामले में कार्रवाई की गई।
इस मामले में शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेन्द्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार और राम किशोर महावर के खिलाफ भी नामजद FIR दर्ज की गई है। जांच एजेंसी इनकी भूमिका और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
मामले की शुरुआत जयपुर के अशोक नगर थाने में 14 अक्टूबर को दर्ज FIR से हुई थी। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरिधारी गोपाल ने कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर डॉक्टरों के पंजीकरण को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी। बाद में जांच SOG को सौंप दी गई।
काउंसिल ने संबंधित फर्जी पाए गए पंजीकरण निरस्त कर दिए हैं। साथ ही, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है।
यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। मेडिकल डिग्री और पंजीकरण में कथित फर्जीवाड़े से यह जानना जरूरी हो जाता है कि मरीज जिस व्यक्ति से इलाज करा रहे हैं, उसकी योग्यता और लाइसेंस की जांच कैसे सुनिश्चित की जाए। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
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