प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, शनिवार रात बारिश शुरू होने के बाद पंडाल में लोगों की भीड़ बढ़ गई। पंडाल के अंदर रोशनी कम होने और प्रवेश तथा निकास के रास्ते संकरे होने के कारण लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई। इसी दौरान भीड़ का दबाव बढ़ने से निकास द्वार का एक हिस्सा गिर गया। इसके बाद अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।
घटना के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य संभाला। हादसे के बाद पंडाल को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया।
हादसे से दो दिन पहले चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल को पश्चिम बंगाल सरकार के ‘देवी दुर्गा सम्मान 2026’ के तहत ‘बेस्ट ऑफ बेस्ट’ श्रेणी में चुना गया था। इस श्रेणी में कोलकाता के तीन पंडालों को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई थी। पंडाल की कलात्मक सजावट और विशेष थीम के कारण बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे थे।
पंडाल के थीम आर्टिस्ट सुशांत शिबानी पाल ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए इसे दुर्गा पूजा के लिए काला दिन कहा। उनके अनुसार, पंडाल में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले भी उपाय किए गए थे, लेकिन हादसे के समय स्थिति बिगड़ गई।
राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की घोषणा की है। जांच में स्पेशल टास्क फोर्स (STF), क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और अन्य विभागों के अधिकारियों को शामिल करने की बात कही गई है। सरकार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से जांच की अगुवाई के लिए न्यायाधीश नामित करने का अनुरोध करेगी। हादसे के समय की CCTV फुटेज भी जांच के दायरे में होगी।
पुलिस ने मामले में आयोजकों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। घटना के कारणों, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में संभावित लापरवाही की जांच की जा रही है।
पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को ग्रुप-D की सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 5 लाख रुपये की सहायता देने और उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही गई है।
कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ प्रबंधन तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में चोरबागान हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में प्रवेश और निकास की व्यवस्था, आपातकालीन रास्तों, पर्याप्त रोशनी और भीड़ नियंत्रण के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। हादसे के लिए जिम्मेदारी तय होने और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों का पता चलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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