मुकाबले में सीकर की मोना अग्रवाल ने 250.0 अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि दो बार की पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता अवनी लेखरा 249.6 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और अंतिम शॉट तक स्वर्ण पदक की दौड़ बनी रही। मोना ने महज 0.4 अंक के अंतर से अवनी को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।
प्रतियोगिता के अंतिम शॉट से पहले मोना अग्रवाल अवनी लेखरा से महज 0.1 अंक आगे थीं। ऐसे में आखिरी शॉट निर्णायक साबित हुआ। मोना ने दबाव के बीच बेहतरीन निशाना लगाते हुए 250.0 अंकों का स्कोर बनाया, जबकि अवनी ने 249.6 अंक हासिल किए। इस तरह राजस्थान की दोनों खिलाड़ियों ने पोडियम पर पहले और दूसरे स्थान पर कब्जा जमाकर देश को गौरवान्वित किया।
अवनी के रजत पदक से भारत को 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक के लिए दूसरा कोटा स्थान मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इससे पहले मोना अग्रवाल ने दक्षिण कोरिया में आयोजित WSPS वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर भारत के लिए पहला कोटा स्थान हासिल किया था।
सीकर में जन्मीं मोना अग्रवाल की सफलता की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति का उदाहरण है। 8 नवंबर 1987 को जन्मीं मोना को महज नौ महीने की उम्र में पोलियो हो गया था, जिससे उनके दोनों पैर प्रभावित हुए। इसके बावजूद उन्होंने खेलों में अपनी पहचान बनाने का संकल्प नहीं छोड़ा।
पैरा शूटिंग में आने से पहले मोना ने पैरा-एथलेटिक्स, पैरा-पावरलिफ्टिंग और सिटिंग वॉलीबॉल में भी हिस्सा लिया। वर्ष 2019 में उन्होंने पहली नेशनल सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में राजस्थान की महिला टीम की कप्तानी की और टीम को स्वर्ण पदक दिलाया।
मोना ने दिसंबर 2021 में राइफल शूटिंग की प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेना शुरू किया। कम समय में ही उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित कर दी। वर्ष 2022 में नेशनल सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी पदक हासिल किए।
वर्ष 2023 में क्रोएशिया के ओसिजेक में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट वर्ल्ड कप के मिक्स्ड टीम इवेंट में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने दक्षिण कोरिया के चांगवोन में आयोजित वर्ल्ड कप में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद पेरिस पैरालंपिक 2024 में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया। खेलों में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2024 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
जयपुर की अवनी लेखरा भी भारतीय पैरा शूटिंग की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं। वर्ष 2012 में महज 10 साल की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी। इस हादसे के बाद उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
चोट से उबरने के दौरान उनके पिता ने उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। ओलंपिक शूटिंग चैंपियन अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा ‘अ शॉट एट हिस्ट्री’ से प्रेरित होकर अवनी ने वर्ष 2015 में निशानेबाजी शुरू की।
खेल के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और राजस्थान विश्वविद्यालय से पांच वर्षीय लॉ डिग्री की पढ़ाई की। निरंतर अभ्यास और मेहनत के दम पर अवनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। वह पैरालंपिक खेलों में दो स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।
पैरा एशियन गेम्स में मोना अग्रवाल और अवनी लेखरा की इस उपलब्धि ने राजस्थान की खेल प्रतिभाओं को एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। दोनों खिलाड़ियों की सफलता यह संदेश देती है कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है।
राजस्थान की इन बेटियों ने अपने प्रदर्शन से न केवल देश का मान बढ़ाया है, बल्कि दिव्यांग खिलाड़ियों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा की नई मिसाल कायम की है।
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