प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, रियायती ऋण और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ कारोबार का विस्तार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें।
पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत कारीगरों को उनके पारंपरिक हुनर को निखारने और आधुनिक कार्य पद्धतियों से परिचित कराने के लिए बुनियादी तथा उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल, कार्य की गुणवत्ता में सुधार और उद्यमशीलता से संबंधित जानकारी पर जोर दिया जाता है।
राजस्थान में अब तक 2 लाख 22 हजार 473 लाभार्थियों का बेसिक प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। इससे कारीगरों को अपने पारंपरिक कौशल को बेहतर बनाने और बाजार की जरूरतों के अनुरूप काम करने में सहायता मिल रही है।
पंजीकरण के मामले में बढ़ई और राजमिस्त्री श्रेणी के कारीगरों की भागीदारी प्रमुख रही है। प्रदेश में बढ़ई श्रेणी के 45 हजार 958 और राजमिस्त्री श्रेणी के 38 हजार 450 कारीगरों का पंजीकरण हुआ है।
योजना के तहत पात्र कारीगरों को अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ऋण रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य उन्हें अपने व्यवसाय के लिए पूंजी उपलब्ध कराना और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता देना है।
राजस्थान में अब तक 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इस वित्तीय सहायता से पात्र कारीगर अपने काम के लिए जरूरी संसाधन जुटाने, उपकरण खरीदने और पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद प्राप्त कर सकते हैं।
योजना में वित्तीय सहायता के साथ कौशल विकास को भी महत्व दिया गया है, ताकि कारीगर केवल ऋण तक सीमित न रहें, बल्कि बेहतर तकनीक और कार्यकुशलता के जरिए अपनी आजीविका को मजबूत कर सकें।
कारीगरों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजना के अंतर्गत टूलकिट सहायता भी दी जाती है। पात्र लाभार्थियों को टूलकिट के लिए 15 हजार रुपये तक की सहायता का प्रावधान है।
राजस्थान में अब तक 2 लाख 17 हजार 84 टूलकिट ई-वाउचर जारी किए जा चुके हैं। इन वाउचर के माध्यम से पात्र कारीगर आवश्यक औजार प्राप्त कर सकते हैं। आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता से काम की गुणवत्ता बेहतर करने, उत्पादकता बढ़ाने और व्यवसाय को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
टूलकिट सहायता विशेष रूप से उन कारीगरों के लिए उपयोगी है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने काम में आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं कर पाते।
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2028 तक देशभर में 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यह लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया गया है।
30 सितंबर 2026 तक देशभर में 30 लाख 3 हजार 925 कारीगरों और शिल्पकारों का पंजीकरण हो चुका था। इनमें से 24.39 लाख से अधिक लाभार्थियों का बेसिक प्रशिक्षण पूरा किया जा चुका है।
राष्ट्रीय स्तर पर योजना के अंतर्गत लगभग 5,350 करोड़ रुपये के 6.23 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा, कारीगरों को टूलकिट सहायता उपलब्ध कराने के लिए 26.17 लाख से अधिक ई-वाउचर जारी किए जा चुके हैं।
ये आंकड़े योजना के माध्यम से पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों तक प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता पहुंचाने के प्रयासों को दर्शाते हैं।
योजना के प्रभाव को लेकर आईआईएम मुंबई के समवर्ती मूल्यांकन में भी सकारात्मक परिणाम सामने आने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सर्वे में शामिल लाभार्थियों में से 93 प्रतिशत ने प्रशिक्षण के बाद अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।
यह निष्कर्ष कौशल विकास और आधुनिक तकनीक से परिचित कराने के महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, यह आंकड़ा सर्वे में शामिल लाभार्थियों से संबंधित है और इसे सभी पंजीकृत कारीगरों के परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पीएम विश्वकर्मा योजना का प्रमुख उद्देश्य बढ़ई, राजमिस्त्री सहित पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और वित्तीय सहायता देकर उनकी आजीविका को मजबूत बनाना है। राजस्थान में पंजीकरण और प्रशिक्षण के आंकड़े बताते हैं कि बड़ी संख्या में कारीगर इस योजना से जुड़ चुके हैं।
प्रदेश में अब चुनौती इन सुविधाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने, पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने और कारीगरों को बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की है। इससे पारंपरिक कौशल को संरक्षित रखने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
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