गजराज राव ने कहा कि राजस्थान से उनका गहरा नाता है। उनका जन्म डूंगरपुर में हुआ, जोधपुर में उनका ससुराल है और जयपुर में उनके कई रिश्तेदार रहते हैं। यही वजह है कि राजस्थान आने पर उन्हें हमेशा अपनापन महसूस होता है। उन्होंने जोधपुर के खाने की तारीफ करते हुए कहा कि यहां का भोजन बहुत अच्छा है, जबकि जयपुर में कचौरी और मिठाइयों की इतनी वैरायटी है कि उसकी कोई सीमा नहीं है।
गजराज राव ने फिल्म ‘बधाई हो’ को अपने करियर का मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि कई बार किसी कलाकार की जिंदगी में ऐसा प्रोजेक्ट आता है, जो उसके करियर की दिशा बदल देता है। उनके लिए ‘बधाई हो’ ऐसी ही फिल्म रही।
अभिनेता के मुताबिक, इस फिल्म ने उन्हें एक अलग पहचान दी और दर्शकों के बीच उनके काम को लेकर जो प्यार बना, वह उनके लिए बेहद मायने रखता है। फिल्म रिलीज होने के कई साल बाद भी लोग उनसे मिलकर इसकी चर्चा करते हैं। नीना गुप्ता और आयुष्मान खुराना के साथ फिल्म की यादें आज भी दर्शकों के बीच ताजा हैं।
गजराज राव का मानना है कि फिल्म लोगों के लिए परिवार के विस्तार जैसी बन गई है। यही वजह है कि समय बीतने के बावजूद इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई।
राजस्थान से अपने रिश्ते के बारे में बात करते हुए गजराज राव ने बताया कि बचपन में उनके पिता उन्हें दिल्ली ले गए थे। उनके पिता को लगता था कि गांव में रहकर उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाएगी। उस समय वह चार-पांच साल के थे।
उन्होंने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब उन्हें स्कूल में दाखिला दिलाया गया, तो वह पट्टी और चॉक लेकर घर की तरफ भाग जाते थे। पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था। इसके बाद हर साल गर्मियों की छुट्टियों में राजस्थान आना होता था।
गजराज राव ने कहा कि जोधपुर उनका ससुराल है और जयपुर में उनके कई रिश्तेदार रहते हैं। यहां आने पर उन्हें हमेशा अपनेपन का एहसास होता है। उन्होंने गट्टे की सब्जी और केर-सांगरी जैसे राजस्थानी व्यंजनों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें अपनेपन का स्वाद मिलता है।
जयपुर में शूटिंग के दौरान यात्रा से जुड़े अपने अनुभव पर गजराज राव ने कहा कि उनका मकसद किसी शहर या व्यक्ति का मजाक उड़ाना नहीं था। वह एक वास्तविक समस्या को हल्के-फुल्के और व्यंग्यात्मक अंदाज में सामने लाना चाहते थे।
उन्होंने बताया कि जयपुर में शूटिंग, कॉरपोरेट कार्यक्रमों और शादियों के सीजन के कारण ट्रैवल कंपनियों पर दबाव रहता है। प्रोडक्शन हाउस को कई बार ऐसे ड्राइवरों और गाड़ियों की जरूरत होती है, जो कलाकारों को सुबह जल्दी शूटिंग लोकेशन तक पहुंचा सकें।
गजराज राव के मुताबिक, जयपुर में शूटिंग के दौरान उन्हें ऐसी गाड़ी मिली, जिसकी पिछली सीट पर सीट बेल्ट नहीं थी। जब उन्होंने ड्राइवर से इस बारे में पूछा, तो उसे यह सामान्य बात लगी। अगले दिन दूसरी गाड़ी में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई। एक ड्राइवर ने तो यह तक कह दिया कि सीट बेल्ट लगाने पर ट्रैफिक पुलिस चालान कर देती है।
इस अनुभव के बाद अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट लिखी, जो वायरल हो गई। उन्होंने कहा कि पोस्ट लिखने का उद्देश्य किसी व्यक्ति या जयपुर शहर का अपमान करना नहीं था। वह खुद राजस्थान से हैं और अपने ही प्रदेश का मजाक उड़ाने का सवाल नहीं उठता।
उन्होंने यह भी कहा कि ड्राइवरों की अपनी मजबूरियां होती हैं। वे लगातार काम करते हैं और उन पर भी दबाव रहता है। उनके अनुसार, किसी समस्या को कड़वाहट के बजाय हास्य के माध्यम से भी सामने रखा जा सकता है।
गजराज राव ने व्यंग्य लेखन में रुचि रखने वालों को मनोहर श्याम जोशी, शरद जोशी, श्रीलाल शुक्ल और डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी जैसे लेखकों को पढ़ने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि इन लेखकों की रचनाओं को पढ़ने से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जीवन में किसी से शिकायत होने पर उसे हमेशा नाराजगी या कड़वाहट के साथ व्यक्त करना जरूरी नहीं है। व्यंग्य और हास्य के जरिए भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है।
गजराज राव अभिनय के साथ विज्ञापन फिल्मों के निर्देशन से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि निर्देशन का काम उन्हें बेहद पसंद है और वह इसे छोड़ना नहीं चाहते।
अभिनेता ने बताया कि जब उनकी किसी फिल्म या दूसरे प्रोजेक्ट की शूटिंग की तारीखें तय होती हैं, तो वह अपने पार्टनर को पहले ही बता देते हैं कि अगले 15 दिन या डेढ़ महीने तक उपलब्ध नहीं रहेंगे। इस तरह वह अभिनय और निर्देशन दोनों के लिए समय निकालने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर, रेड लेबल चाय और ब्रू कॉफी जैसे अपने नियमित विज्ञापन क्लाइंट्स का भी जिक्र किया। गजराज राव के अनुसार, निर्देशन उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि ऐसा काम है, जिसे करते हुए उन्हें आनंद मिलता है।
गजराज राव का मानना है कि जब दर्शक किसी कलाकार के काम को पसंद करने लगते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। कलाकार को दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतरने के साथ यह भी देखना चाहिए कि उसे अपने काम में आनंद मिल रहा है या नहीं।
उन्होंने कहा कि रिहर्सल का अनुभव, शूटिंग का माहौल और सहकर्मियों के साथ काम करने का तरीका उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वह ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना चाहते हैं, जिनमें उन्हें नए अनुभव मिलें, नए दोस्त बनें और काम के दौरान सफर का आनंद लेने का अवसर मिले।
गजराज राव की बातचीत से साफ है कि उनके लिए अभिनय केवल लोकप्रियता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि लगातार सीखने, नए अनुभव जुटाने और अपने काम से जुड़ी खुशी को बनाए रखने का जरिया भी है। वहीं, राजस्थान से उनका जुड़ाव आज भी उनकी यादों, पसंद और अनुभवों में साफ दिखाई देता है।
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