हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह करीब 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर करीब 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर की शाम को मनाया जाएगा।
जयपुर के पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर को माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 3 मिनट से रात 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
प्रदोष काल: शाम 5:40 बजे से रात 8:16 बजे तक
वृषभ काल: शाम 6:03 बजे से रात 7:59 बजे तक
लक्ष्मी-गणेश पूजन: शाम 6:03 बजे से रात 7:59 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में स्थिर वृषभ लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है। ये मुहूर्त जयपुर के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। अन्य शहरों में स्थानीय पंचांग और सूर्यास्त के समय के अनुसार अंतर हो सकता है।
दीपावली के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर की साफ-सफाई करें। शाम को पूजा स्थल पर चौकी स्थापित कर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। इसके बाद माता लक्ष्मी और मां सरस्वती को रोली, अक्षत, फूल, माला, फल और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करें और श्रद्धापूर्वक आरती करें। व्यापारी वर्ग इस दिन अपने प्रतिष्ठानों में नए बही-खातों की पूजा यानी चोपड़ा पूजन भी करता है।
लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए प्रतिमा या तस्वीर, पूजा चौकी, लाल या पीला कपड़ा, रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत, फूल, माला, पान, सुपारी, नारियल, फल, मिठाई, घी, तेल, मिट्टी के दीपक, रुई की बत्ती, धूप, अगरबत्ती, कपूर, कलावा, गंगाजल और पंचामृत की व्यवस्था रखें। परंपरा के अनुसार खील-बताशे और कमल का फूल भी पूजा में अर्पित किया जाता है।
दीपावली का पर्व दीपों के बिना अधूरा माना जाता है। इस दिन दीपक जलाने की कोई एक निश्चित संख्या निर्धारित नहीं है। श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार लोग 11, 21, 51 या 101 दीपक जलाते हैं।
घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, आंगन, छत, खिड़कियों और तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत का प्रतीक माने जाते हैं।
घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें।
शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करें।
घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं।
जरूरतमंद लोगों को भोजन, कपड़े और सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
परिवार के साथ खुशियां बांटें और आपसी प्रेम व भाईचारे को बढ़ावा दें।
स्थानीय कारीगरों से मिट्टी के दीपक खरीदकर उन्हें प्रोत्साहित करें।
दीपावली के दिन घर में गंदगी और अव्यवस्था न रखें। पूजा के दौरान जल्दबाजी से बचें और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करें। किसी से झगड़ा या विवाद न करें। पटाखे जलाते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें और ज्वलनशील पदार्थों के पास आतिशबाजी न करें। खुले स्थान पर सुरक्षित तरीके से पटाखे जलाएं तथा ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करने का प्रयास करें।
दीपावली केवल धन और समृद्धि की कामना का पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन से अंधकार, नकारात्मकता और बुराइयों को दूर कर प्रकाश, ज्ञान और सद्भाव अपनाने का संदेश भी देता है। इस दीपावली पर अपने घर को दीपों से रोशन करें, जरूरतमंदों की मदद करें और खुशियां अपनों के साथ बांटें।
TNI आवाज़ परिवार की ओर से सभी दर्शकों और पाठकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। माता लक्ष्मी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रकाश बना रहे।
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