जयपुर। राजधानी जयपुर के सांगानेर क्षेत्र स्थित ग्राम भम्भौरिया की लगभग 11.09 हेक्टेयर (करीब 43.84 बीघा) भूमि को लेकर विवाद सामने आया है। भारतीय मीडिया काउंसिल ने इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और शहरी विकास एवं आवास विभाग (यूडीएच) के सचिव को पत्र भेजकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
काउंसिल के अनुसार, उसे प्राप्त शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पूर्व राजस्व अभिलेखों में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर माफी भूमि के रूप में दर्ज भूमि का कथित रूप से नियमों के विपरीत भू-रूपांतरण कर निजी खातेदारी में शामिल किया गया।
शिकायत में कहा गया है कि पूर्व खसरा संख्या जो वर्तमान में संवत 2015 से 2034 तक राजस्व अभिलेखों में मंदिर माफी भूमि के रूप में दर्ज रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि धारा 90-क के प्रावधानों की कथित अनदेखी करते हुए लगभग 11.09 हेक्टेयर भूमि का भू-रूपांतरण कराया गया। शिकायत के अनुसार, मैसर्स सेटिसफेक्शन होम प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में भू-रूपांतरण आदेश जारी किया गया तथा बाद में उक्त भूमि का हस्तांतरण मैसर्स केडिया रियल एस्टेट एलएलपी के पक्ष में किया गया। शिकायत में आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में इस भूमि पर ग्रुप हाउसिंग परियोजना के लिए एकल पट्टा जारी किया गया।
भारतीय मीडिया काउंसिल ने अपने पत्र में मांग की है कि जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की संबंधित भू-रूपांतरण पत्रावली, नोटशीट, अनुमोदन प्रक्रिया और ऐतिहासिक राजस्व अभिलेखों की जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या निजी संस्था की भूमिका नियमों के विपरीत पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
काउंसिल ने यह भी अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक, यदि आवश्यक समझा जाए, तो संबंधित भूमि पर नए निर्माण, हस्तांतरण अथवा विकास गतिविधियों पर रोक लगाने पर भी विचार किया जाए। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है, तो नियम-विरुद्ध जारी भू-रूपांतरण आदेशों एवं संबंधित अनुमतियों को निरस्त करने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जाए।
हालांकि, यह पूरा मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मैसर्स सेटिसफेक्शन होम प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स केडिया रियल एस्टेट एलएलपी, जयपुर विकास प्राधिकरण अथवा अन्य संबंधित पक्षों की ओर से इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली जांच और उसके निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
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